कर्नल प्रीति तिवारी के नेतृत्व में नारी उत्कर्ष संस्था ने रचा इतिहास; 'ऑपरेशन सिंदूर' की नायिकाओं से लेकर महिला उद्यमियों तक का हुआ सम्मान।
जब मिलिट्री स्टेशन बना नारी शक्ति का प्रेरणा-स्रोत
माउंट आबू की ऊंचाइयों पर स्थित मिलिट्री स्टेशन आज केवल सैन्य गतिविधियों का केंद्र नहीं रहा, बल्कि नारी शक्ति के जयघोष का साक्षी बना। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 'नारी उत्कर्ष संस्था' और गुजरात NCC बटालियन की कमान संभाले कर्नल प्रीति तिवारी ने मिलकर एक ऐसी मिसाल कायम की, जो यह दर्शाती है कि जब अनुशासन और सेवा का भाव मिलता है, तो महिलाओं का उत्थान निश्चित है। यह कोई साधारण समारोह नहीं था, बल्कि उन अनकहे संघर्षों और सफलताओं का सम्मान था, जिन्हें अक्सर समाज की नजरें नहीं देख पातीं।
सफलता की दास्तानें: सेवा और उद्यम का सम्मान
इस गरिमामयी कार्यक्रम में उन महिलाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया जो समाज के लिए एक स्तंभ की तरह हैं:
- सफलता की मिसाल: एक ऐसी महिला को सम्मानित किया गया जो आज अपने दम पर कुशल गृह-उद्योग चलाकर आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं।
- अदम्य सेवा भाव: सम्मान की अगली कड़ी में 'ऑपरेशन सिंदूर' की वह जांबाज महिला शामिल थी, जिन्होंने उस कठिन समय में फौज की महिलाओं का एक परिवार की तरह ध्यान रखा।
- मार्गदर्शक (Big Sisters): संस्था ने उन महिलाओं को 'बड़ी दीदी' के तौर पर सम्मानित किया, जो न केवल खुद आगे बढ़ रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को जागरूक और प्रेरित कर रही हैं।
उपस्थिति: कार्यक्रम में नारी उत्कर्ष संस्था की सचिव विभा श्रोत्रिय, अध्यक्ष विराज देसाई, रजनी अग्रवाल, ज्योत्सना देसाई, मीरा कंवर, लीला बेन परमार, माया अग्रवाल, सुधा सिंघल, सिद्धि बंसल, मीना गर्ग और अंजू अग्रवाल सहित संस्था की तमाम सदस्य मौजूद रहीं।

सेना और नागरिक संस्थाओं का यह मिलन स्पष्ट करता है कि 'महिला दिवस' का अर्थ केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन बाधाओं को तोड़ने का संकल्प है जो महिलाओं के सपनों के आड़े आती हैं। माउंट आबू की ठंडी हवाओं के बीच इन महिलाओं का उत्साह और कर्नल प्रीति तिवारी का ओजस्वी नेतृत्व इस बात का प्रमाण है कि नारी शक्ति ही राष्ट्र निर्माण की असली बुनियाद है।








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