जहाँ बड़े-बड़े अस्पतालों ने खड़े किए हाथ, वहाँ सिरोही के इस अस्पताल ने बिना चीरा-टांका के कराई सफल प्रसव डिलीवरी
सिरोही/आबूरोड: चिकित्सा जगत में असंभव सी लगने वाली एक ऐसी अद्भुत घटना सामने आई है जिसने पूरे राजस्थान में सनसनी फैला दी है। सिरोही जिले का चर्चित भारती हॉस्पिटल एवं सोनोग्राफी सेंटर एक बार फिर अपनी अद्वितीय चिकित्सा शैली और सफलता के दम पर प्रदेशभर की सुर्खियों में छा गया है। अस्पताल ने महज 2 घंटे के भीतर कुल 12 नॉर्मल डिलीवरी करवाकर एक ऐसा स्वर्णिम इतिहास रच दिया है, जिसकी गूंज अब जयपुर के सियासी गलियारों से लेकर चिकित्सा विभाग के उच्च अधिकारियों तक सुनाई दे रही है।
वीवीआईपी परिवारों का अटूट भरोसा: मंत्रियों और डॉक्टरों की पहली पसंद बना अस्पताल
अब यह बात किसी से छुपी नहीं है कि जटिल से जटिल मामलों में भी नॉर्मल डिलीवरी का पर्याय बन चुके भारती हॉस्पिटल का कौशल किस स्तर का है। इस ऐतिहासिक फेहरिस्त में कई खास नाम शामिल हैं:

- राज्यमंत्री के परिवार में गूंजी किलकारी: प्रदेश के माननीय राज्य मंत्री श्री ओटाराम जी देवासी के पीएसओ श्री वीरा रामजी (मोबाइल नंबर: 9619124678) की धर्मपत्नी लासी देवी का सफल प्रसव इसी अस्पताल में हुआ। वह भी पूरी तरह नॉर्मल और बिना किसी चीरे या टांके के।
- स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र के अधिकारी की पत्नी बनीं मिसाल: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेंद्र सिंह खिंवसर के गृह क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले और वर्तमान में पिंडवाड़ा के खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMHO) डॉ. भूपेंद्र प्रताप सिंह जी (मोबाइल नंबर: 7229950777) की धर्मपत्नी डॉ. सोनू कुंवर शेखावत की भी नॉर्मल डिलीवरी भारती हॉस्पिटल में ही बिना चीरा-टांका के सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

इन विशिष्ट उदाहरणों ने यह साबित कर दिया है कि आज 'नॉर्मल डिलीवरी मतलब भारती हॉस्पिटल' केवल एक नारा नहीं, बल्कि सुरक्षित मातृत्व का सबसे बड़ा विश्वास बन चुका है। यही वजह है कि अब राजनेताओं और खुद चिकित्सा जगत से जुड़े डॉक्टरों की भी पहली पसंद भारती हॉस्पिटल एवं सोनोग्राफी सेंटर बन गया है।
जब बड़े अस्पतालों ने बोल दिया 'सिजेरियन' का ताला, भारती हॉस्पिटल ने खोला नॉर्मल का रास्ता
प्रसव पीड़ा के समय जब गर्भवती महिलाओं को अन्य बड़े शहरों के नामी अस्पतालों में यह कहकर डरा दिया जाता है कि "अब ऑपरेशन (सी-सेक्शन) के अलावा कोई चारा नहीं है," ऐसे समय में भारती हॉस्पिटल उम्मीद की एक नई किरण बनकर उभरता है। इसी ऐतिहासिक दिन कई ऐसी माताओं का सफल प्रसव कराया गया, जिन्हें दूर-दराज के बड़े अस्पतालों ने ऑपरेशन का कह दिया था:

- देवपूरी गोस्वामी (पत्नी देवपूरी गोस्वामी, निवासी- रामपुरा) - जिन्हें आबूरोड में सिजेरियन का बोल दिया गया था।
- सुगना देवी (वीरमा राम सिलोया, निवासी- सिरोही) - जिन्हें सिरोही में ऑपरेशन की सलाह दी गई थी।
- कांता (पत्नी मोतीलाल हीरागर, निवासी- चामुंडेरी) - जिन्हें पाली और उदयपुर के बड़े अस्पतालों ने सिजेरियन केस बताया था।
- ममता (पत्नी अर्जुन कलबी, निवासी- दांतराई) - जिन्हें आबूरोड में ऑपरेशन अनिवार्य बताया गया था।
- दिव्या (पत्नी अशोक राजपुरोहित, निवासी- सान्थु, जालौर) - जिन्हें जालौर के सबसे बड़े निजी अस्पताल ने सिजेरियन का कहकर डरा दिया था।
- नीलम (पत्नी सुरेशजी पामेरा, निवासी- माली समाज, सिरोही) - जिन्हें सिरोही अस्पताल से ऑपरेशन का कहकर भेजा गया था।
इन सभी पीड़ित माताओं को जब अन्य जगहों से निराशा हाथ लगी, तब वे आशा भरी निगाहों से भारती हॉस्पिटल पहुँचीं। यहाँ के कुशल चिकित्सकों ने कुछ ही मिनटों में सभी की नॉर्मल डिलीवरी करवाकर न केवल मानवता का अनूठा परिचय दिया, बल्कि ऑपरेशन के दर्द और आर्थिक बोझ से भी परिवारों को बचा लिया।
एक ही दिन बने कई अद्भुत संयोग
इस विशेष दिन समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े कई अन्य प्रसव भी इसी अस्पताल में हुए, जिन्होंने इस दिन को और भी ज्यादा ऐतिहासिक बना दिया:
- अमरापुरा गाँव के चौधरी समाज की दो सगी बहनों — लक्ष्मी (पत्नी अग्रारामजी कलबी) और गवरी (पत्नी रगारामजी कलबी) की डिलीवरी भी इसी अस्पताल में एक साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
- आवाड़ा निवासी कोली समाज की देवू (पत्नी वगता रामजी कोली) का भी सुरक्षित प्रसव कराया गया।
निष्कर्ष: सेवा और समर्पण की मिसाल
आज भारती हॉस्पिटल एवं सोनोग्राफी सेंटर केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं रहा, बल्कि यह उन अनगिनत माताओं और परिवारों के लिए वरदान बन गया है जो सामान्य प्रसव की उम्मीद खो चुके थे। भारती हॉस्पिटल और उसकी पूरी टीम ने अपनी बेहतरीन सूझबूझ, अटूट सेवा-भाव और चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यशैली से यह साबित कर दिखाया है कि यदि जज्बा सच्चा हो, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।







पाठक टिप्पणियां (Comments)
0 टिप्पणियां