सर्कल न्यूज नेटवर्क
रेवदर (सिरोही)। जहां आज के दौर में निजी अस्पतालों में कदम रखते ही प्रसव के नाम पर 'सिजेरियन ऑपरेशन' तय मान लिया जाता है, वहीं रेवदर के भारती हॉस्पिटल एंड सोनोग्राफी सेंटर ने चिकित्सा जगत में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है जिसकी गूंज पूरे मारवाड़ और गोडवाड़ क्षेत्र में सुनाई दे रही है। अस्पताल के स्त्री रोग विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ ने महज 24 घंटे के भीतर रिकॉर्ड 26 गर्भवती महिलाओं का पूरी तरह सुरक्षित 'नॉर्मल प्रसव' (प्राकृतिक डिलीवरी) करवाकर नया इतिहास रच दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इनमें से कई महिलाओं को बड़े शहरों के नामी सर्जनों ने 'हाई-रिस्क' बताकर तुरंत पेट पर चीरा लगाने यानी सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दे डाली थी।

ऑपरेशन का डर लेकर पहुंचीं, गोद में हंसता-खेलता नौनिहाल लेकर लौटीं
अस्पताल प्रबंधन से मिले आंकड़ों के अनुसार, भर्ती होने वाली कई गर्भवती महिलाएं ऐसी थीं जिनका पहला प्रसव ऑपरेशन (एलएससीएस) से हुआ था। आमतौर पर चिकित्सा पद्धति में पहले सिजेरियन के बाद दूसरा प्रसव भी सर्जरी से ही कराने का चलन बढ़ चुका है, लेकिन भारती हॉस्पिटल की मेडिकल टीम ने धैर्य, निरंतर मॉनिटरिंग और सटीक चिकित्सकीय सूझबूझ के दम पर 'वीबॅक' (VBAC - सिजेरियन के बाद नॉर्मल डिलीवरी) को संभव कर दिखाया।
24 घंटे के भीतर गूंजी इन 26 किलकारियों में मारवाड़ के सर्वसमाज की भागीदारी देखने को मिली। प्रसूताओं में देवासी समाज की 7, कोली समाज की 5, चौधरी समाज की 3, भील समाज की 3, गरासिया समाज की 3, मुस्लिम समाज की 2, हीरागर समाज की 2 और वैष्णव समाज की 1 महिला शामिल रहीं।

24 घंटे सोनोग्राफी और राउंड-द-क्लॉक स्पेशलिस्ट बने रीढ़
अस्पताल की इस सफलता का सबसे बड़ा कारण यहां मौजूद आधुनिक आपातकालीन व्यवस्थाएं हैं। आमतौर पर ग्रामीण व उपखंड स्तर पर रात के समय आपातकालीन सोनोग्राफी या विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को गुजरात या जोधपुर रेफर कर दिया जाता है। भारती हॉस्पिटल में:
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24 घंटे सोनोग्राफी सुविधा: भ्रूण की धड़कन और गर्भनाल की स्थिति पर हर पल नजर।
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फुल-टाइम स्त्री रोग विशेषज्ञ: किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक मौके पर तैनात।
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इन-हाउस 24x7 लैब व मेडिकल: जांच रिपोर्ट और जरूरी जीवनरक्षक दवाइयों के लिए तीमारदारों को बाहर नहीं भटकना पड़ता।
मारवाड़-गोडवाड़ की सीमाएं लांघकर पहुंच रही हैं महिलाएं
यह भरोसा ही है कि आज सिरोही जिले के अलावा जालोर, पाली, बाड़मेर और संभाग मुख्यालय जोधपुर तक से परिवार अपनी बहु-बेटियों को लेकर सीधे रेवदर का रुख कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि जहां महानगरों के अस्पतालों में लाखों के बिल और ऑपरेशन का डर सताता है, वहीं रेवदर में डॉक्टरों का मानवीय दृष्टिकोण और प्राकृतिक प्रसव को पहली प्राथमिकता देने की नीति उनके लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही है। रिकॉर्ड 26 प्रसवों के बाद जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं।









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