जालौर-सिरोही। शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में किए गए शिक्षकों के तबादलों ने जालौर और सिरोही जिले की शैक्षणिक व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। सांसद लुंबाराम चौधरी ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार को आगाह किया है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

शिक्षकों की भारी कमी से ठप हो रही ग्रामीण शिक्षा
जिले से बड़ी संख्या में प्रधानाचार्यों, व्याख्याताओं और वरिष्ठ अध्यापकों का बाहर स्थानांतरण कर दिया गया है। इसके विपरीत, अन्य जिलों से जालौर और सिरोही आने वाले शिक्षकों की संख्या नगण्य है। सांसद लुंबाराम चौधरी ने स्पष्ट किया है कि सिरोही जैसे आकांक्षी जिले में पहले ही शिक्षकों के पद रिक्त हैं, और अब इन थोक तबादलों से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में पढ़ाई पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि स्कूलों में शिक्षकों की यह कमी जल्द दूर नहीं की गई, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
सांसद की मांग और चेतावनी
सांसद लुंबाराम चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि तबादला नीति में तत्काल बदलाव किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया है कि 'रिलीविंग' की प्रक्रिया को संतुलित किया जाए—अर्थात, जब तक किसी दूसरे जिले से शिक्षक का स्थानांतरण होकर पदस्थापन न हो जाए, तब तक संबंधित शिक्षक को कार्यमुक्त न किया जाए। सांसद ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि शिक्षा के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि शिक्षण व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।







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