सफलता की अमर गाथा : 6 बार मिली नाकामी, 7वें प्रयास में 'जालोरी शेर' प्रीतम सिंह ने रचा इतिहास; भाई संजय के साथ मिलकर जालोर के आंगन में रोपा 'शौर्य का कल्पवृक्ष'
एक ही घर से देश सेवा में दो 'कोहिनूर', पिता महेंद्र सिंह के कलेजे के टुकड़ों ने समूचे राजपूताना का सीना गर्व से किया चौड़ा; जालोर में ऐतिहासिक स्वागत समारोह…


