सर्कल न्यूज नेटवर्क
पंसेरी। आधुनिकता की चकाचौंध और पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण के बीच स्थानीय राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पंसेरी के प्रांगण में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को भावविभोर कर दिया। विद्यालय में बालिकाओं के प्रति सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक चेतना जागृत करने के उद्देश्य से एक भव्य 'कन्या पूजन' कार्यक्रम का गरिमामय एवं भक्तिमय माहौल में आयोजन किया गया। इस दौरान समूचा परिसर देवी के जयकारों से गूंज उठा। विद्यालय की नन्हीं-मुन्नी बालिकाओं को साक्षात माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों के रूप में विराजित कर अतिथियों व शिक्षकों द्वारा तिलक लगाया गया, विधि-विधान से आरती उतारी गई और उनके चरण प्रक्षालन व वंदन कर आशीर्वाद लिया गया।

केवल किताबी ज्ञान से नहीं, संस्कारों से गढ़ा जाएगा चरित्र : बिश्नोई
कार्यक्रम लाडूराम बिश्नोई (ACBEO) के मुख्य आतिथ्य एवं धर्मदान चारण की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। बतौर मुख्य अतिथि सभा को संबोधित करते हुए लाडूराम बिश्नोई ने दो टूक शब्दों में कहा कि सिर्फ डिग्रियों और किताबी ज्ञान से समाज का समग्र विकास कतई संभव नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, "शिक्षा के साथ समाज को संस्कारित, अनुशासित और चरित्रवान बनाने के लिए शिक्षण संस्थानों में ऐसे सांस्कृतिक व नैतिक आयोजनों की सबसे ज्यादा दरकार है। ऐसे प्रयासों से ही भावी पीढ़ी में अपनी संस्कृति और नारी शक्ति के प्रति वास्तविक आदर भाव अंकुरित होता है।"

पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से नई पीढ़ी को बचाना जरूरी : जोशी
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित मुकेश कुमार जोशी (प्रदेश संयोजक, शैक्षिक प्रकोष्ठ ABRSM) ने अपने ओजस्वी संबोधन में वर्तमान सामाजिक परिदृश्य पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि माँ दुर्गा स्वरूपा इन कन्याओं के पूजन और यथोचित सम्मान से ही भारतीय सनातन मूल्य और संस्कार जीवंत रह पाएंगे। जोशी ने आगाह करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य प्रभाव की अंधी दौड़ में भटक रही है; ऐसे दौर में हमें स्वामी विवेकानंद जी के राष्ट्र निर्माणकारी विचारों और माता अनुसूया के त्याग, समर्पण व सतीत्व से ओत-प्रोत जीवन चरित्र को केवल पढ़ना नहीं, बल्कि अपने दैनिक आचरण में आत्मसात करना होगा।
संस्कारविहीन शिक्षा निरर्थक : वक्ताओं का मंथन
विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य गणपतसिंह राव ने कहा कि संस्कारविहीन शिक्षा समाज के लिए कभी हितकारी नहीं हो सकती, इसे हर हाल में पाठ्यक्रम और दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाना होगा। वहीं देवीसिंह देवल ने गिरते नैतिक मूल्यों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज के दौर में स्कूलों में ऐसे आयोजन समय की सबसे बड़ी अनिवार्यता बन चुके हैं।
समारोह में छात्र प्रतिनिधि सुरेश कुमार और छात्रा कविता कुमारी ने भी कन्या पूजन की महत्ता और विद्यार्थी जीवन में नैतिक आचरण पर ओजस्वी विचार रखे, जिन्हें सुन उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से उनका उत्साहवर्धन किया।









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