खेल-खेल में शिक्षा, रंगों से कल्पनाओं को उड़ान और मां के साथ डांस ने लूटी महफिल; बाल वाटिका के बच्चों को मिला प्रतिभा दिखाने का शानदार मंच
मालवाड़ा। नन्हे हाथों में रंग, चेहरों पर मासूम मुस्कान, आंखों में चमक और कुछ नया कर दिखाने का उत्साह...! कुछ ऐसा ही मनमोहक नजारा बुधवार को मालवाड़ा गांव स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में देखने को मिला। मौका था ईसीसीई दिवस के अवसर पर आयोजित बाल मेले के प्रथम चरण का, जहां नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी और प्रथम कक्षा के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपनी छिपी प्रतिभाओं का ऐसा शानदार प्रदर्शन किया कि अभिभावक और शिक्षक भी उनकी कला, कल्पनाशीलता और आत्मविश्वास के कायल हो गए।
विद्यालय परिसर में आयोजित बाल मेला केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, रचनात्मक सोच और खेल-खेल में सीखने की अनूठी पाठशाला बनकर सामने आया।

मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार आयोजित बाल मेले का शुभारंभ पीईईओ हंजारीमल माली एवं चिकित्सा अधिकारी श्रवण बिश्नोई के मुख्य आतिथ्य में मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
प्रधानाचार्य मुकेश कुमार जोशी ने बताया कि बाल मेले का मुख्य उद्देश्य शुरुआती कक्षाओं के बच्चों को ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वे बिना किसी दबाव के खेल, कला और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीख सकें तथा अपनी रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और प्रतिभा को निखार सकें।
कहीं मिट्टी से बने खिलौने, तो कहीं नन्हे हाथों ने कागज पर बिखेरे सपनों के रंग
बाल मेले में लगाए गए विभिन्न शैक्षणिक और रचनात्मक स्टॉल आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। बच्चों ने रंगों और आकारों की पहचान, गिनती, मिलान, पहेलियां सुलझाने, मिट्टी से खिलौने बनाने, चित्रों में रंग भरने और हाथों की छाप से सुंदर कलाकृतियां तैयार करने जैसी गतिविधियों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
इसके अलावा कहानी सुनाना, कविता पाठ, अक्षर पहचान, वाचन और चित्र देखकर वर्णन करने जैसी गतिविधियों के जरिए बच्चों ने अपने भाषा कौशल और आत्मविश्वास का परिचय दिया।

मां के साथ नन्हे कदमों की थिरकन बनी मेले की खास पहचान
बाल मेले में आयोजित पेपर नृत्य प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस अनोखी प्रतियोगिता में छोटे-छोटे बच्चों ने अपनी मां या बहन के साथ नृत्य प्रस्तुत किया। बच्चों और उनके परिजनों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन में उत्साह और उमंग का माहौल बना दिया।
वहीं म्यूजिकल चेयर, चम्मच दौड़, गुब्बारा फोड़, जलेबी कूद और रिंग फेंकने जैसी खेल प्रतियोगिताओं में बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में सहभागिता, एकाग्रता, शारीरिक समन्वय और आत्मविश्वास को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
अभिभावक भी बने बच्चों की खुशियों के भागीदार
बाल मेले की विशेष बात यह रही कि इसमें बच्चों के साथ उनके अभिभावकों की भी सक्रिय भागीदारी रही। बाल वाटिका शिक्षिकाओं ने बच्चों को अपने माता-पिता के साथ विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
छात्र-छात्राओं द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉल भी अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बने। बच्चों की प्रतिभा और उत्साह ने विद्यालय परिसर को उत्सव जैसा माहौल प्रदान किया।
हर नन्हा सितारा हुआ सम्मानित, पुरस्कार पाकर खिले चेहरे
आयोजन के दौरान बाल वाटिका की तीनों कक्षाओं नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी और प्रथम कक्षा के समस्त छात्र-छात्राओं को पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
प्रधानाचार्य मुकेश कुमार जोशी के निर्देशन और मेंटर शिक्षक राजेश कुमार के प्रभावी नेतृत्व में बाल वाटिका शिक्षिकाओं सुमन मीणा एवं अंजना मीणा ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कक्षा अध्यापक संजू बिश्नोई एवं जितेंद्र कुमार ने पूर्व में तैयार कार्ययोजना को प्रभावी रूप से धरातल पर उतारा। वहीं शिक्षक निमेश कुमार एवं राजेश कुमार का विभिन्न स्टॉल एवं गतिविधियों के संचालन में विशेष सहयोग रहा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावक, विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के सदस्य तथा विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा। आयोजन को सफल बनाने में शिक्षिका सुनीता विश्नोई, वसनाराम, अमृतलाल, कृष्ण कुमार पुरोहित, महिमा, नरेंद्र सिंह, जसवंत कंवर, लक्ष्मी देवी सहित अन्य स्टाफ सदस्यों का विशेष सहयोग रहा।
बाल मेले ने दिया बड़ा संदेश: बच्चों की प्रतिभा केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं होती। सही मंच और प्रोत्साहन मिले तो नन्हे हाथ भी कला, रचनात्मकता और आत्मविश्वास के ऐसे रंग बिखेर सकते हैं, जो उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनें।









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