सर्कल न्यूज नेटवर्क (Circle News Network)
लेह: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। रविवार को लेह में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की 'लद्दाख बेंच' का औपचारिक उद्घाटन किया गया। समुद्र तल से करीब 3,500 मीटर (लगभग 11,500 फीट) की ऊंचाई पर स्थित यह बेंच देश की सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित हाई कोर्ट पीठ बन गई है।
समारोह के दौरान मुख्य अतिथि ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था लद्दाख के नागरिकों और वकीलों को भौगोलिक बाधाओं से मुक्त कर सीधे देश की शीर्ष अदालतों से जोड़ेगी।
सदियों पुरानी भौगोलिक चुनौतियों का अंत
ऐतिहासिक दृष्टि से साल 1870 में लेह में एक विशेष अदालत की स्थापना की गई थी, लेकिन भौगोलिक जटिलताएं पीढ़ियों तक बनी रहीं। लद्दाख के लोगों को उच्च न्यायालय स्तर के मामलों के लिए महान हिमालय के उस पार श्रीनगर या जम्मू जाना पड़ता था। सर्दियों में भारी बर्फबारी और दर्रे बंद होने के कारण हवाई सफर ही एकमात्र विकल्प बचता था, जिससे न्याय पाना समय और धन दोनों के लिहाज से बेहद महंगा हो जाता था। वर्ष 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिलने के बाद इस दिशा में बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार किया गया है।
वर्चुअल तकनीक: सीधे सुप्रीम कोर्ट में लिस्ट होंगे केस
इस नई बेंच के माध्यम से आधुनिक डिजिटल तकनीक का उपयोग कर मामलों का निस्तारण किया जाएगा:
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एक ही दिन मामलों की सुनवाई: लद्दाख से जुड़े मामलों को एक ही दिन सूचीबद्ध किया जाएगा और वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए नियमित सुनवाई होगी।
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सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच: लेह और करगिल बार एसोसिएशन के वकील अब बिना लद्दाख छोड़े वर्चुअल माध्यम से सीधे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामलों की पैरवी कर सकेंगे।
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दूरी और खर्च की बचत: वादियों और वकीलों को अब बार-बार दिल्ली या श्रीनगर की यात्रा करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे कानूनी प्रक्रिया सुगम और सस्ती बनेगी।
लेह और करगिल दोनों के लिए समान व्यवस्था
उद्घाटन अवसर पर इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि यह पीठ लेह और करगिल दोनों जिलों के लिए समान रूप से कार्य करेगी। इसका वास्तविक उद्देश्य तभी सिद्ध होगा जब लद्दाख के दूरदराज के क्षेत्रों का प्रत्येक नागरिक इसे अपना मानेगा। स्थानीय प्रशासन और न्यायिक संस्थाओं के सहयोग से स्थापित यह पीठ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक समय पर न्याय पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगी।









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