रानीवाड़ा बस स्टैंड की वो इनसाइड स्टोरी जिसने सत्ता के गलियारों में मचाया हड़कंप!
रानीवाड़ा (जालोर)। रानीवाड़ा कस्बे के दिल में स्थित लगभग 100 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं की गिद्ध दृष्टि जम चुकी है। बड़गांव रोड पर स्थित राजस्थान पथ परिवहन निगम (रोडवेज) का बस स्टैंड आज विभागीय उदासीनता और राजनीतिक उपेक्षा के चलते लावारिस हालत में पड़ा है। कूट रचित दस्तावेजों और रसूखदारों की मिलीभगत से इस बेशकीमती भूखंड को हड़पने की सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसे लेकर कस्बे में बड़े जनांदोलन की जमीन तैयार हो रही है।
दानदाताओं की नेकी पर माफियाओं का डाका?
मामला वर्ष 1988 का है, जब स्वर्गीय पूर्व मंत्री रघुनाथ विश्नोई के कृषि फार्म के सामने दानदाताओं के सहयोग से रानीवाड़ा को नए बस डिपो की सौगात मिली थी। लोकार्पण समारोह के बाद विधिवत रूप से यह जमीन राजस्थान रोडवेज को हैंडओवर की गई।
शुरुआती दौर में यहां शानदार भवन, यात्री प्रतीक्षालय, शौचालय और चारदीवारी का निर्माण हुआ। रोडवेज की बसें दौड़ती थीं, लिपिक स्तर का स्टाफ (प्रभु राम जोशी, मनोहर सिंह आदि) तैनात था और परिसर में रौनक रहती थी। लेकिन धीरे-धीरे विभाग ने इसे 'चालू करो-बंद करो' के खेल में उलझा दिया। आज आलम यह है कि न तो यहां बसें रुकती हैं और न ही कोई कर्मचारी मौजूद है।

फर्जीवाड़े की साजिश और बैनर वॉर
रोडवेज की इसी आपराधिक लापरवाही का फायदा उठाकर भू-माफिया सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कूट रचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार कर इस भूमि को खुर्द-बुर्द करने की अंडरग्राउंड साजिशें रची जा रही हैं। हाल ही में कुछ लोगों द्वारा जमीन पर कब्जा करने की नीयत से बैनर तक टांग दिए गए थे, जिसे सजग ग्रामीणों ने तुरंत हटाकर मंसूबों पर पानी फेरा।
पूर्व प्रधान नरेंद्र विश्नोई ने बजाया खतरे का बिगुल
सांचोर पंचायत समिति के पूर्व प्रधान एवं पूर्व उप जिला प्रमुख नरेंद्र कुमार विश्नोई (मो. 9413655501) ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए इस गंभीर मामले को पुरजोर तरीके से उठाया है।
"1988 में राजस्थान सरकार के आदेश पर जनता की सुविधा के लिए यह बस स्टैंड रोडवेज को सौंपा गया था। आज विभाग की चुप्पी और कुछ भ्रष्ट तंत्र की मिलीभगत से इस 100 करोड़ की जमीन को हड़पने का खेल चल रहा है। जिला कलेक्टर जालोर और राज्य सरकार तुरंत संज्ञान लेकर इस सार्वजनिक संपत्ति को बचाएं।" — नरेंद्र कुमार विश्नोई, पूर्व प्रधान
सत्ता और विपक्ष दोनों मौन: जनता में भारी उबाल
हैरानी की बात यह है कि रानीवाड़ा के मान और जनता की सुविधा से जुड़े इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी संदिग्ध बनी हुई है:
- वर्तमान विधायक रतन देवासी (कांग्रेस): क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन बस डिपो की बहाली और जमीन के संरक्षण को लेकर कोई ठोस पैरवी नहीं दिख रही।
- पूर्व विधायक नारायण सिंह देवल (भाजपा): राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद इस बेशकीमती सार्वजनिक धरोहर को बचाने के लिए सक्रिय कदम नहीं उठा रहे हैं।
रानीवाड़ा बस स्टैंड
चेत जाए सरकार, वरना रानीवाड़ा बनेगा 'जंतर-मंतर'!
कस्बे के बीचों-बीच स्थित ऐसी बेशकीमती जमीन दोबारा नहीं मिल सकती। जनता की मांग है कि यहां आधुनिक सुविधाओं से लैस डिपो का पुनः संचालन शुरू हो ताकि यात्रियों को दर-दर न भटकना पड़े।
यदि जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने समय रहते भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए, तो रानीवाड़ा की सड़कों पर बड़ा विद्रोह फूटना तय है। ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी है कि कस्बे को धरने-प्रदर्शन का केंद्र बनने से रोका जाए, वरना इसका खामियाजा क्षेत्र की राजनीति में लंबी महत्वाकांक्षा रखने वाले नेताओं को भुगतना पड़ेगा।









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