22 दिसंबर को राजपूत कोटड़ी में होगा भव्य समारोह, रानीवाड़ा प्रांत की दर्जनों शाखाओं के स्वयंसेवक और मातृशक्ति होंगी शामिल
सर्कल न्यूज़ नेटवर्क रानीवाड़ा/सेवाड़ा। अनुशासन, संस्कार और संगठन के पर्याय माने जाने वाले श्री क्षत्रिय युवक संघ का 80वां स्थापना दिवस समारोह इस बार रानीवाड़ा क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से मनाने की तैयारी है। आगामी 22 दिसंबर, सोमवार को सेवाड़ा स्थित राजपूत कोटड़ी में दोपहर 3:00 बजे आयोजित होने वाले इस समारोह में समाज की एकजुटता और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।

परंपरागत निमंत्रण से बढ़ा उत्साह कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर जानकारी देते हुए मोतीसिंह सेवाड़ा ने बताया कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कारों का उत्सव है। रानीवाड़ा प्रांत के इस सामूहिक कार्यक्रम के लिए जनसंपर्क अभियान जोरों पर है। स्वयंसेवकों की टोलियों ने घर-घर जाकर पारंपरिक तरीके से ‘पीले चावल’ देकर समाजबंधुओं को न्योता दिया है। निमंत्रण को लेकर गांवों में भारी उत्साह है और बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है।
इन गांवों से उमड़ेगा जनसैलाब समारोह में सेवाड़ा के अलावा आसपास के दर्जनों गांवों से स्वयंसेवक और समाज के लोग भाग लेंगे। मुख्य रूप से जाखड़ी, रतनपुर, मेड़क, पांचला, पालड़ी, सुरावा, लाछीवाड़, धामसीन, जोड़वास, करवाड़ा, करड़ा, खारा, डुंगरी, डोरंडा, जाविया, उचमत, तेजावास, कागमाला और चाण्डपुरा की विभिन्न शाखाओं से जुड़े बालक-बालिकाएं (पथ-संचालक), स्वयंसेवक, वरिष्ठ समाज बंधु और बड़ी संख्या में मातृशक्ति (महिलाएं) अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी।

विशेष: क्या है श्री क्षत्रिय युवक संघ?
1946 में हुई थी स्थापना, आज वटवृक्ष बना संघ श्री क्षत्रिय युवक संघ महज एक संगठन नहीं, बल्कि मनुष्य निर्माण की एक प्रयोगशाला है। इसकी स्थापना 22 दिसंबर 1946 को मरुधरा के मनीषी स्व. श्री तनसिंह जी (बाड़मेर) द्वारा की गई थी।
- उद्देश्य: संघ का मुख्य उद्देश्य क्षत्रिय युवाओं में अपने गौरवशाली इतिहास के प्रति स्वाभिमान, सुसंस्कार, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना जागृत करना है।
- कार्यप्रणाली: यह संघ “ईश्वर की इच्छा ही हमारा कर्म है” (ईशावस्यमिदं सर्वं) के सिद्धांत पर कार्य करता है। संघ अपनी विशिष्ट कार्यप्रणाली, जैसे- शिविर (कैम्प), शाखा और स्नेह मिलन के माध्यम से युवाओं को मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाता है।
- 80 साल का सफर: एक छोटे से पौधे के रूप में शुरू हुआ यह संघ आज अपनी हीरक जयंती पार कर 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, जिसने समाज को हजारों कर्मठ और चरित्रवान नागरिक दिए हैं।
भव्य होगा नजारा सोमवार दोपहर को जब सैकड़ों की संख्या में गणवेशधारी स्वयंसेवक और पारंपरिक परिधान में समाज के लोग एक साथ जुटेंगे, तो सेवाड़ा की राजपूत कोटड़ी अनुशासन की मिसाल पेश करेगी। आयोजन समिति ने सभी आगंतुकों के लिए माकूल व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं।



