जाखड़ी गाँव के किसानों ने सीएम और एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, कहा—"रिश्वतखोरी से बंटा मुआवज़ा, हक़दार किसान रह गए महरूम"
रानीवाड़ा।
मौजा जाखड़ी, तहसील रानीवाड़ा, जिला जालोर के किसानों ने खरीफ 2024 में हुई फसल तबाही के बाद भी मुआवज़ा न मिलने पर गहरा एतराज़ जताया है। किसानों ने बताया कि उन्होंने मुंगफली और बाजरा का फसल बीमा करवाया था, लेकिन भारी बरबादी के बावजूद बीमा कंपनी ने सिर्फ 5% नुकसान दिखाकर पल्ला झाड़ लिया।
ग्रामवासियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी के कर्मचारियों ने रिश्वत लेने वालों को ही मुआवज़ा बाँटा, जबकि असल नुक़सान झेलने वाले किसान अब तक इन्तज़ार कर रहे हैं। एक ही खसरे में दो भाइयों का अलग-अलग बीमा हुआ—एक को मुआवज़ा मिला और दूसरे को इंकार कर दिया गया। यह सीधा पक्षपात और अन्याय है।
किसानों ने बताया कि हल्का पटवारी द्वारा पहले किये गये सर्वे में सही खराबा प्रतिशत दर्ज था, लेकिन कंपनी ने उसे नज़रअंदाज़ कर मनमानी की।
किसानों की यह सामूहिक आवाज़ करणी सेना अध्यक्ष रेवत सिंह देवड़ा की अगुवाई में उठी और मुख्यमंत्री तथा उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में माँग की गई है कि—
- खराबा प्रतिशत का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए।
- पक्षपात और रिश्वतखोरी में लिप्त कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई हो।
- पीड़ित किसानों के खातों में तुरंत मुआवज़ा राशि डाली जाए।
जाखड़ी के किसानों की यह जंग अब सिर्फ मुआवज़े की लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय और ईमानदारी की जंग बन चुकी है। सवाल साफ है—क्या मेहनतकश किसान का हक़ रिश्वत की थैली में दबा दिया जाएगा या सरकार किसानों को उनका हक दिलाएगी?







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