बालकों में क्षत्रियोच्चित गुणों के अर्जन को लेकर रानीवाड़ा प्रांत के जाखड़ी में शुरू हुआ आवासीय शिविर, पांचों मंडलों से 150 शिविरार्थी ले रहे हैं भाग
रानीवाड़ा / जाखड़ी:
संस्कार, सेवा और समर्पण की त्रिवेणी बहाने वाले 'श्री क्षत्रिय युवक संघ' का चार दिवसीय प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर सोमवार को रानीवाड़ा प्रांत के जाखड़ी गांव में पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ आरंभ हो गया। संघ के इस महत्वपूर्ण आवासीय शिविर को लेकर ग्रामीण अंचल और क्षत्रिय समाज के युवाओं में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है।
शिविर की शुरुआत से पूर्व ही जाखड़ी सहित सुरावा, रतनपुर, रानीवाड़ा, सेवाड़ा, जोड़वास, मेड़क, धामसीन, डुंगरी, तेजावास, कागमाला, चाण्डपुरा, डाडोकी, पहाड़पुरा, पुरण, राजीकावास, सिंगावास और रानीवाड़ा खुर्द जैसे दर्जनों गांवों में उत्सव जैसा माहौल बन गया था।

प्रातः कालीन जागरण से रात्रि विश्राम तक होगी अनुशासित दिनचर्या
रानीवाड़ा मंडल प्रमुख रेवन्त सिंह जाखड़ी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस चार दिवसीय आवासीय शिविर में रानीवाड़ा प्रांत के पांच प्रमुख मंडलों—सुरावा, करड़ा, रानीवाड़ा, मालवाड़ा और जसवंतपुरा से लगभग 150 बालकों और युवाओं ने शिविरार्थी के रूप में पंजीयन करवाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
उन्होंने बताया कि शिविर की रूपरेखा अत्यंत अनुशासित और सर्वांगीण विकास पर केंद्रित रखी गई है। शिविर के दौरान प्रातः कालीन बेला में जागरण से लेकर रात्रि विश्राम तक विभिन्न सांघिक गतिविधियों का संचालन किया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से सहभागियों में क्षत्रियोच्चित गुणों, अनुशासन, कर्तव्यपरायणता और नेतृत्व क्षमता के अर्जन का विशेष अभ्यास करवाया जाएगा।
व्यक्तित्व निर्माण के हर पहलू पर रहेगा जोर
कार्यशाला के मुख्य आकर्षण के बारे में बताते हुए आयोजकों ने स्पष्ट किया कि युवाओं के सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण के लिए हरसंभव पहलू को छुआ जाएगा। सामूहिक संस्कारमयी कार्यप्रणाली के माध्यम से बालकों को जीवन में उच्च आदर्शों को अपनाने, समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस प्रेरणादायी आयोजन को सफल बनाने और व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और कार्यकर्ताओं का पूर्ण सहयोग मिल रहा है। इस अवसर पर फुल सिंह, भगवत सिंह, रेवन्त सिंह जाखड़ी, माधु सिंह, गणपत सिंह रतनपुर, वीरम सिंह सुरावा, जनक सिंह कागमाला, श्रवण सिंह चाण्डपुरा, भरत सिंह सेवाड़ा और भगवान सिंह सांगड़वा सहित बड़ी संख्या में संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।









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