रानीवाड़ा.
रतनपुर गांव के ग्रामीणों ने सोमवार को रानीवाड़ा उपखंड अधिकारी सुनीलकुमार को ज्ञापन सौंपकर गांव की गोचर भूमि को गोशाला के नाम पर कब्जे से मुक्त कराने की माँग की। ग्रामीणों का आरोप है कि एक संस्था द्वारा कथित गोसेवा के नाम पर सरकारी ज़मीन हड़पने का कुटिल प्रयास किया जा रहा है, और अब वहां पक्के निर्माण कर सरकारी जमीन को निजी संपत्ति में तब्दील करने की कोशिश हो रही है।
इस मामले को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। सरपंच प्रतिनिधि कृष्णकुमार देवासी, लक्ष्मणसिंह देवड़ा, गणपतसिंह देवड़ा, विनोद जोशी, उदाराम देवासी सहित कई लोग ज्ञापन देने पहुंचे और चेतावनी दी कि 24 घंटे के भीतर गोशाला को गोचर भूमि से हटाया जाए और गोवंश को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जाखड़ी और रतनपुर की सरहद पर शाह पोपटभाई जैन द्वारा संचालित गोशाला ट्रस्ट ने रतनपुर की 14 बीघा गैर-मुमकिन गोचर भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। आरोप यह भी है कि रतनपुर गांव की बेसहारा गोमाताओं को इस गोशाला में प्रवेश नहीं दिया जाता और ट्रस्ट में गांव के किसी भी व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया है।

पोपटभाई जैन की ओर से दावा किया गया कि ग्राम पंचायत की अनापत्ति के बाद ही निर्माण करवाया गया है, और यह कार्य पूरी नीयत से गोसेवा के लिए किया जा रहा है। मगर ग्रामीणों का कहना है कि यदि नीयत साफ होती, तो गांव की गोमाताओं को ठुकराया नहीं जाता। यह भेदभाव वाली सोच गांव में गहरी नाराजगी का कारण बन रही है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम सुनीलकुमार ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और नियमानुसार जांच कर कार्रवाई के निर्देश तहसीलदार हनवंतसिंह देवड़ा को दिए गए हैं। अब देखना यह होगा कि गोचर की भूमि पर कब्जे का यह विवाद प्रशासनिक स्तर पर कैसे सुलझता है — क्या गोशाला हटेगी या मामला और गहराएगा?
गोचर भूमि पर कब्जे और गोसेवा के नाम पर निजीकरण की इस उठती लपटों ने ग्रामीणों और प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। सवाल ये भी है कि क्या नियमों की ओट में हकीकत को ढका जा सकता है, या ग्रामीणों की आवाज़ फिर एक मिसाल बनेगी?



