झालावाड़ की घटना से भी सबक नहीं: 40 साल पुराने जर्जर भवन में चल रहा आंगनबाड़ी, बच्चों के लिए बन रहा ‘मौत का सामान’
रानीवाडा, 26 जुलाई। झालावाड़ में सरकारी स्कूल की छत गिरने से 7 मासूमों की दर्दनाक मौत के बाद जहां पूरा राजस्थान सदमे में है, वहीं शिक्षा विभाग की ‘कागजी सतर्कता’ की पोल खुलती नजर आ रही है। रानीवाड़ा क्षेत्र में जिला कलेक्टर के ‘अलर्ट मोड’ और शिक्षा विभाग के ‘हरकत में आने’ के तमाम दावों के बावजूद, रतनपुर के सरकारी गर्ल्स स्कूल का भयावह सच सामने आया है। यहां 1985 में बना एक 40 साल पुराना जर्जर भवन, जिसके दो कमरे पूरी तरह से खंडहर हो चुके हैं, उसमें बेशर्मी से आंगनबाड़ी केंद्र चलाया जा रहा है। यह सीधे तौर पर मासूमों की जान से खिलवाड़ है!

मौत का सामान परोसा जा रहा आंगनबाड़ी में!
सूचना के मुताबिक, रतनपुर के इस गर्ल्स स्कूल के जर्जर कमरों में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहा है। इतना ही नहीं, इन्हीं खतरनाक कमरों में बच्चों के लिए भोजन भी पकाया जा रहा है और आंशिक रूप से वहीं वितरित भी किया जा रहा है। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को सिहरा देगा। एक तरफ सरकार बच्चों की सुरक्षा के दावे कर रही है, दूसरी तरफ शिक्षा विभाग की नाक के नीचे ‘मौत का सामान’ परोसा जा रहा है। आखिर यह लापरवाही कब तक चलेगी? क्या विभाग किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
प्रधानाचार्या की बेबसी, कार्यकर्ता की गुहार
रतनपुर गर्ल्स स्कूल की प्रधानाचार्या गीता बहन ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए बताया कि स्कूल में 120 बच्चियां पढ़ रही हैं। हालांकि, मुख्य स्कूल भवन का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्र इसी जर्जर ढांचे में चल रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी इस भयावह स्थिति से अवगत हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यह भवन बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है और इसे तुरंत धराशायी कर नया भवन बनाया जाना चाहिए ताकि बच्चों, अभिभावकों और ग्रामीणों को खतरे से मुक्त किया जा सके। उनकी यह मार्मिक पुकार सीधे तौर पर शिक्षा विभाग के कानों तक क्यों नहीं पहुंच रही?

सजग ग्रामीण ने खोली पोल, सवाल शिक्षा विभाग पर
यह चौंकाने वाली जानकारी रतनपुर के सजग कार्यकर्ता और समाज सेवी गणपत सिंह देवड़ा ने वीडियो ग्राफी सहित उपलब्ध कराई है। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ बताया है कि इस खतरनाक भवन की शिकायत उच्च अधिकारियों को कई बार की जा चुकी है, लेकिन नतीजा सिफर है।
सवाल सीधे शिक्षा विभाग से:
- क्या झालावाड़ की त्रासदी से भी शिक्षा विभाग ने कोई सबक नहीं लिया है?
- जब जिला कलेक्टर ‘अलर्ट मोड’ पर हैं और इंस्पेक्शन हो रहे हैं, तो फिर रतनपुर जैसे स्कूल क्यों नजरअंदाज किए जा रहे हैं?
- क्या विभाग को आंगनबाड़ी में संचालित ‘मौत के सामान’ की परवाह नहीं है, जहां मासूम बच्चों की जान जोखिम में डाली जा रही है?
- कब तक जर्जर भवनों को ढहाकर नए और सुरक्षित ढांचे बनाए जाएंगे? क्या शिक्षा विभाग को किसी और बड़े हादसे का इंतजार है, जिसके बाद ही उनकी कुंभकर्णी नींद खुलेगी?
राजस्थान सरकार और जिला प्रशासन को चाहिए कि वे इस गंभीर मामले पर तुरंत संज्ञान लें और रतनपुर के इस सरकारी गर्ल्स स्कूल के जर्जर भवन को तत्काल ध्वस्त करवाकर नया और सुरक्षित भवन बनवाएं। मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ बंद होना चाहिए!



