मायलावास स्थित खेतेश्वर गुरुकुल में दीपावली स्नेह मिलन समारोह 2026 संपन्न। डॉ. ध्यानारामजी महाराज ने दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश, 18 राज्यस्तरीय खिलाड़ी सम्मानित।
मायलावास (बालोतरा)
थार की धरा पर जब प्राचीन गुरुकुल परंपरा और आधुनिक प्रतिभा का संगम हुआ, तो हर आंख उस अलौकिक दृश्य की मुरीद हो गई। ब्रह्मर्षि खेतेश्वर गुरुकुल, मायलावास में रविवार को आयोजित 'दीपावली स्नेह मिलन समारोह-2026' केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, योग शक्ति और प्रकृति वंदना का एक जीवंत महाकुंभ बन गया। पूज्य वेदांताचार्य डॉ. ध्यानारामजी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित इस भव्य जलसे में विद्यार्थियों, अभिभावकों और मातृशक्ति की भारी मौजूदगी से पूरा परिसर श्रद्धा और उत्साह से सराबोर दिखा।
मायलावास खेतेश्वर गुरुकुल में दीपावली स्नेह मिलन समारोह
जब मंच पर उतरा राजस्थान का गौरव: तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा पांडाल
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की आराधना और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। जैसे ही बालकों ने योग नृत्य और कठिन शारीरिक व्यायाम की हैरतअंगेज मुद्राएं पेश कीं, उपस्थित जनसमूह दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर हो गया।
इसके बाद जब विद्यार्थियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे होकर प्रसिद्ध राजस्थानी लोकनृत्य 'सोने री चिड़कली' पर भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं, तो पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं, भारतीय संस्कारों में ढले गुरुकुल के बटुकों ने जब धाराप्रवाह अंग्रेजी में भाषण देकर अपने विचार रखे, तो यह साबित हो गया कि यह गुरुकुल सिर्फ वेद ही नहीं, बल्कि आधुनिक दुनिया से आंख मिलाने वाली शिक्षा भी दे रहा है।
"प्रकृति बचेगी तभी सुरक्षित रहेगी मानवता" : डॉ. ध्यानारामजी महाराज का आह्वान
समारोह को संबोधित करते हुए वेदांताचार्य डॉ. ध्यानारामजी महाराज ने कहा कि दीपावली केवल दीये जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर और समाज में फैली बुराइयों व प्रदूषण के अंधकार को मिटाने का संकल्प है। उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण को आज की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए कहा:
"गुरुकुल की शिक्षा का मूल आधार ही प्रकृति और संस्कृति का सम्मान है। पेड़-पौधे और शुद्ध जल-वायु हमारे अस्तित्व की नींव हैं। आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण सुरक्षा का दायित्व संभालना होगा।"
मायलावास खेतेश्वर गुरुकुल में दीपावली स्नेह मिलन समारोह
शिक्षा से लेकर खेल मैदान तक दबदबा: 18 होनहारों ने बढ़ाया मान
इस स्नेह मिलन के मंच से जब गुरुकुल की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड सामने रखा गया, तो अभिभावकों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।
गुरुकुल के 18 विद्यार्थियों का चयन राज्य स्तर की विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में हुआ है, जो ग्रामीण अंचल में खेल प्रतिभा के निखार का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
बोर्ड एवं गृह परीक्षाओं में उत्कृष्ट परिणाम हासिल करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष मंच पर सम्मानित किया गया।
अनुशासित रहन-सहन को बढ़ावा देने वाली गणवेश प्रतियोगिता तथा पूर्व में आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव की मनमोहक झांकियों व मटकी फोड़ स्पर्धा के विजेताओं को भी पुरस्कृत कर उनकी हौसला-अफजाई की गई।
भामाशाहों के समर्पण को नमन, गुरु-शिष्य परंपरा का दिखा आदर्श रूप
समारोह में गुरुकुल के विकास और जरूरतमंद विद्यार्थियों के संबल बनी 'समाज शिक्षा निधि समर्पण योजना' में सहयोग देने वाले दानदाताओं एवं भामाशाहों का आभार जताया गया। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि आधुनिक चकाचौंध के बीच मायलावास का यह गुरुकुल वैदिक ज्ञान, गुरु-शिष्य परंपरा और समग्र व्यक्तित्व विकास का एक ऐसा दीपस्तंभ बनकर उभरा है, जिसकी रोशनी पूरे मारवाड़ को संस्कारित कर रही है। समारोह के अंत में सभी ने एक-दूसरे को दीपावली की बधाई देकर क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
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