सर्कल न्यूज़ नेटवर्क
जालोर। पश्चिमी राजस्थान से गुजरात जाने वाले हजारों यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ सकती है। बाड़मेर-जालोर-साबरमती रेल मार्ग पर नियमित दैनिक पैसेंजर ट्रेन चलाने की मांग ने अब जोर पकड़ लिया है। क्षेत्र के रेल यात्रियों की वर्षों पुरानी समस्या और मांग को देखते हुए ‘यात्री सुविधा सेवा समिति, जालोर’ ने सीधे केंद्रीय रेल मंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर जनहित में तुरंत ट्रेन संचालन की गुहार लगाई है।

समिति के अध्यक्ष हीराचन्द भण्डारी द्वारा प्रेषित पत्र में समदड़ी-भीलड़ी रेल खंड पर सफर करने वाले आम यात्रियों के दर्द को प्रमुखता से उठाया गया है।
रोज हजारों यात्री सफर में झेल रहे परेशानी
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि बाड़मेर–जालोर–साबरमती रेलमार्ग पर प्रतिदिन हजारों लोग मजदूरी, व्यापार, गंभीर बीमारियों के इलाज और उच्च शिक्षा के सिलसिले में गुजरात और अहमदाबाद (साबरमती) का रुख करते हैं। वर्तमान में इस पूरे रूट पर एक भी नियमित दैनिक पैसेंजर ट्रेन उपलब्ध नहीं होने के कारण आम गरीब यात्रियों, मजदूरों और विद्यार्थियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
निजी बसों की मनमानी और जेब पर भारी बोझ
स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्याप्त पैसेंजर ट्रेनों के अभाव में यात्रियों को निजी बसों और अन्य साधनों से महंगा किराया चुकाकर यात्रा करनी पड़ती है।
- मरीजों की मजबूरी: अहमदाबाद के बड़े अस्पतालों में उपचार के लिए जाने वाले गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सीधी व सस्ती ट्रेन जीवनरेखा का काम करती है।
- व्यापारी और कामगार: कपड़ा, ग्रेनाइट और स्थानीय व्यापार से जुड़े छोटे व्यापारी व श्रमिक वर्ग को रोजमर्रा के आवागमन में सुरक्षित और किफायती यात्रा विकल्प नहीं मिल पा रहा।
- छात्र वर्ग: गुजरात और राजस्थान के सीमावर्ती शहरों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए पैसेंजर ट्रेन सबसे सुरक्षित और सस्ता साधन है।
पीएमओ और रेलवे महाप्रबंधक को भी भेजी गई प्रतिलिपि
यात्री सुविधा सेवा समिति ने इस मांग पत्र की प्रतिलिपियां माननीय प्रधानमंत्री, उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक (जयपुर) तथा मंडल रेल प्रबंधक (जोधपुर) को भी भेजी हैं, ताकि इस पर उच्च स्तर पर त्वरित निर्णय लिया जा सके।
समिति अध्यक्ष हीराचन्द भण्डारी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन इस रूट पर शीघ्र ही बाड़मेर से साबरमती तक नियमित पैसेंजर ट्रेन शुरू करता है, तो मारवाड़ और गुजरात के सीमावर्ती जिलों के लाखों लोगों को सीधी राहत मिलेगी। अब देखना यह होगा कि रेलवे मंत्रालय जनता की इस बहुप्रतीक्षित मांग पर कब तक हरी झंडी दिखाता है।









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