कागमाला स्कूल की छात्राओं ने कर दिखाया कमाल! चार्ट के ज़रिए सीखा कठिन काव्यशास्त्र
जालोर: काव्यशास्त्र हुआ आसान! बालिका विद्यालय की चार्ट प्रदर्शनी देख हर कोई हुआ हैरान
कागमाला (जालोर), विशेष संवाददाता। जालोर जिले के कागमाला स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में हाल ही में एक अनोखी चार्ट प्रदर्शनी का आयोजन हुआ, जिसने शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार की मिसाल पेश की। हिंदी साहित्य के कठिन माने जाने वाले काव्यशास्त्र को सरल, रोचक और प्रभावी ढंग से समझाने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रदर्शनी में छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा और विषय की गहरी समझ का शानदार प्रदर्शन किया।
रंगीन चार्ट्स में सिमटा काव्यशास्त्र
प्रदर्शनी में छात्राओं ने काव्यशास्त्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर आकर्षक और ज्ञानवर्धक चार्ट तैयार किए। रंग-बिरंगे चित्रों, तालिकाओं और सरल व्याख्याओं के माध्यम से जटिल अवधारणाओं को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि देखने वाला हर व्यक्ति प्रभावित हुआ। चार्ट्स में छात्राओं की मेहनत, सूझबूझ और रचनात्मकता साफ झलक रही थी।
"गतिविधि से बढ़ती है रुचि": प्रधानाचार्य
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री नारायण लाल जीनगर ने कहा कि ऐसी गतिविधियों से विद्यार्थियों में विषय के प्रति रुचि बढ़ती है और कठिन विषय भी आसानी से समझ आने लगते हैं। उन्होंने बताया कि चार्ट प्रदर्शनी के माध्यम से छात्राओं को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और गतिविधि आधारित शिक्षण का अवसर मिला। इससे उनमें सृजनात्मक चिंतन, अभिव्यक्ति कौशल और सामूहिक कार्य की भावना का विकास होता है।
नवाचार से बनता है ज्ञान स्थायी: रमेश कुमार पंचाल
कार्यक्रम के प्रभारी एवं व्याख्याता श्री रमेश कुमार पंचाल ने छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षण में नवाचार और गतिविधि आधारित विधियों का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों के ज्ञान को स्थायी बनाती हैं और उनमें आत्मविश्वास भी जगाती हैं।
अतिथि व स्टाफ रहे मौजूद
इस अवसर पर बतौर अतिथि श्री दीपसिंह देवल, खंड साक्षरता समन्वयक उपस्थित रहे। विद्यालय स्टाफ से वरिष्ठ अध्यापक प्रकाश कुमार गर्ग, कविता चौधरी, सीता शर्मा, चेना राम परिहार, देशराज, महेंद्र कुमार, बगदाराम एवं आरती कुमारी सहित बड़ी संख्या में छात्राएँ मौजूद रहीं। कार्यक्रम में छात्राओं की सक्रिय भागीदारी और उत्साह सराहनीय रहा।
क्या है काव्यशास्त्र?
काव्यशास्त्र हिंदी साहित्य की वह शाखा है जिसमें रस, छंद, अलंकार, काव्य गुण, काव्य दोष, शब्द शक्ति, रीति और ध्वनि जैसे विषयों का अध्ययन किया जाता है। विद्यार्थियों को यह विषय अक्सर कठिन लगता है, इसलिए चार्ट, चित्र और गतिविधियाँ इसे समझने का कारगर तरीका साबित होती हैं।
गतिविधि आधारित शिक्षण क्यों ज़रूरी?
- सीखी हुई बातें लंबे समय तक याद रहती हैं
- परीक्षा की तैयारी में मदद मिलती है
- विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और संवाद कौशल बढ़ता है
- नई शिक्षा नीति (NEP 2020) भी रटंत प्रणाली की जगह अनुभव आधारित शिक्षा पर जोर देती है
ग्रामीण स्कूलों के लिए मिसाल
कागमाला जैसे ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी विद्यालय में हुआ यह नवाचार दूसरे स्कूलों के लिए प्रेरणा बन सकता है कि सीमित संसाधनों में भी रचनात्मक तरीकों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा सकती है।









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