अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले आयोजित गुरु वंदन कार्यक्रम में वक्ताओं ने महर्षि वेदव्यास जयंती के पौराणिक महत्व और राष्ट्र निर्माण में गुरु की भूमिका को रेखांकित किया।
सांचौर/रानीवाड़ा। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय कागमाला में बुधवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा), संकुल कागमाला खंड रानीवाड़ा के तत्वावधान में भव्य 'गुरु वंदन कार्यक्रम' का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद भारतीय संस्कृति की गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन करते हुए विद्यालय की बालिकाओं ने उपस्थित गुरुजनों को मौली बांधकर, कुमकुम का तिलक लगाकर और श्रीफल भेंट कर उनका आत्मीय अभिनंदन किया।

वक्ताओं के विचार और प्रेरणादायी संदेश
- गुड़िया कंवर (छात्रा): गुरु-शिष्य संबंधों पर ओजस्वी उद्बोधन देते हुए विद्यार्थियों से गुरुजनों की आज्ञा का पालन करने और उनके बताए मार्ग पर चलकर जीवन सफल बनाने का आह्वान किया।
- दीपसिंह देवल (संभाग संयुक्त मंत्री, एबीआरएसएम): गुरु पूर्णिमा के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व आदिगुरु महर्षि वेदव्यास जी की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। गुरु अज्ञानता का अंधकार मिटाकर जीवन को सही दिशा देते हैं और श्रेष्ठ नागरिक का निर्माण कर राष्ट्र को सशक्त बनाते हैं।
- मुकेश कुमार जोशी (प्रदेश संयोजक, शैक्षिक प्रकोष्ठ): उन्होंने चाणक्य-चंद्रगुप्त और समर्थ रामदास-शिवाजी महाराज के ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए बताया कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों में समर्पण और दायित्व बोध को सुदृढ़ करते हैं।
- नारायण लाल जीनगर (प्रधानाचार्य व कार्यक्रम अध्यक्ष): महासंघ की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में गुरुजनों के प्रति श्रद्धा भाव और चारित्रिक गुणों का विकास होता है।

कार्यक्रम की झलकियां
कार्यक्रम का ओजस्वी संचालन व्याख्याता रमेश कुमार पंचाल ने किया और गुरु महिमा पर आधारित एक मधुर गीत प्रस्तुत किया। संकुल संयोजक नरेश पंवार ने कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की।
इस अवसर पर वरिष्ठ अध्यापक प्रकाश कुमार, सीता देवी शर्मा, चेनाराम, महेंद्र देवासी, देशराज, दुर्जन सिंह, आरती कुमारी, पायल कुमारी सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।







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