एक ऐसा फैसला जिसने साबित कर दिया कि जब समाज ठान ले, तो आने वाली पीढ़ियों की तकदीर बदल जाती है! सरपंच ठाकुर महेंद्र सिंह देवल की अगुवाई में उमड़ा सर्वसमाज, शिक्षा के मंदिर को मिलने जा रहा है भव्य स्वरूप
कागमाला (कुंदनपुर):
कहते हैं कि अगर इरादे बुलंद हों और नीयत साफ, तो समाज का हर वर्ग मिलकर विकास की ऐसी इबारत लिखता है जो आने वाली सदियों तक मिसाल बनती है। कुछ ऐसा ही ऐतिहासिक और प्रेरणादायक नजारा आज कागमाला (कुंदनपुर) की पावन धरा पर देखने को मिला।

आज दिनांक 25 जून 2026 को चामुण्डा माता जी मंदिर के पवित्र प्रांगण में सरपंच ठाकुर महेंद्र सिंह देवल की देखरेख और गरिमामयी उपस्थिति में एक अति महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक सिर्फ विचारों का आदान-प्रदान नहीं थी, बल्कि गाँव के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और शिक्षा की अलख जगाने का एक महा-अभियान साबित हुई।
1. 1965 की वो नींव… जो आज वटवृक्ष बन चुकी है
शिक्षा का कोई भी सफर रातों-रात तय नहीं होता। श्री पंच महाजन संघ – कागमाला (कुंदनपुर) ने आज से दशकों पहले, वर्ष 1965 में शिक्षा का जो छोटा सा पौधा रोपा था, आज वह एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। संघ ने 1965 में प्राथमिक शिक्षा की आवश्यकता को समझते हुए यहाँ ‘उच्च प्राथमिक विद्यालय’ का निर्माण करवाया था।

2. समय बदला, जरूरतें बढ़ीं और क्रमिक विकास की नई गाथा लिखी गई
जैसे-जैसे गाँव के बच्चों में पढ़ने की ललक बढ़ी, वैसे-वैसे इस विद्यालय का स्वरूप भी बदलता गया। कालबाधित विकास के साथ यह स्कूल पहले माध्यमिक विद्यालय बना और अब क्रमोन्नत होकर उच्च माध्यमिक विद्यालय (Higher Secondary School) के रूप में गाँव और आसपास के सैकड़ों छात्र-छात्राओं के सपनों को पंख दे रहा है।
3. कमरों की तंगी बनी रुकावट, तो सामने आई नई उम्मीद
समय के साथ छात्र संख्या में काफी इजाफा हुआ, जिससे विद्यालय में कमरों की भारी कमी हो गई। बच्चों को बैठने और पढ़ने में असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। लेकिन कागमाला की माटी की यह खासियत रही है कि यहाँ समस्याओं पर रोने के बजाय समाधान की राह खोजी जाती है। ग्रामीणों ने इस विकट समस्या को श्री पंच महाजन संघ कागमाला (कुंदनपुर) के सामने पूरी जिम्मेदारी के साथ रखा।

4. 2.50 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक संकल्प: जब दानशीलता बनी प्रेरणा!
ग्रामीणों की वाजिब मांग और बच्चों की तकलीफ को भांपते हुए श्री पंच महाजन संघ ने उदारता और सामाजिक सरोकार का ऐसा उदाहरण पेश किया जो पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बन गया है। संघ ने विद्यालय के भव्य एवं आधुनिक नवीन भवन निर्माण हेतु करीब 2.50 करोड़ रुपये की विशाल राशि देने की पूर्ण सहमति प्रदान कर दी। इस निर्णय से न केवल कमरों की समस्या खत्म होगी, बल्कि कागमाला के बच्चों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक नई शिक्षण व्यवस्था मिलेगी।
5. 36 कौम का अटूट विश्वास और सरपंच महेंद्र सिंह की अगुवाई का कमाल
यह ऐतिहासिक सहमति किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ’36 कौम’ के अटूट भाईचारे की मिसाल बनी। बैठक में सर्वसमाज (छत्तीस कौम) के प्रबुद्ध नागरिकों, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सरपंच ठाकुर महेंद्र सिंह देवल के कुशल मार्गदर्शन और निरंतर प्रयासों के कारण ही समाज के हर तबके को एक मंच पर लाकर इस महान कार्य को अमलीजामा पहनाया जा सका।
6. दिल से निकला आभार, गूंज उठा चामुण्डा माता का प्रांगण
जैसे ही 2.50 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नवीन भवन की घोषणा हुई, पूरा मंदिर प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उपस्थित 36 कौम के सभी लोगों ने एकजुट होकर श्री पंच महाजन संघ कागमाला (कुंदनपुर) के भामाशाहों एवं पदाधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने कहा कि महाजन संघ का यह योगदान केवल ईंट-पत्थर का भवन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के सपनों को दी गई एक नई उड़ान है।
प्रेरणा संदेश:
कागमाला का यह कदम पूरे राजस्थान और देश के ग्रामीण अंचल के लिए एक बड़ा संदेश है कि जब गाँव का नेतृत्व मजबूत हो और भामाशाहों का दिल बड़ा हो, तो सरकारी तंत्र के भरोसे बैठे बिना भी शिक्षा के मंदिरों को भव्य बनाया जा सकता है।



