सिरोही, जालौर और आबुरोड के अस्पतालों ने जब सिजेरियन ऑपरेशन ही बताया एकमात्र रास्ता, तब रेवदर के भारती हॉस्पिटल ने अपनी चिकित्सा दक्षता से माँ और बच्चों को दी नई जिंदगी
रेवदर/सिरोही। आज के दौर में जब चिकित्सा जगत पर व्यावसायीकरण हावी होता जा रहा है और मामूली जटिलता दिखते ही 'सिजेरियन डिलीवरी' (ऑपरेशन) को ही एकमात्र विकल्प बता दिया जाता है, ऐसे समय में रेवदर का भारती हॉस्पिटल एवं सोनोग्राफी सेंटर विश्वास और मानवता का दूसरा नाम बनकर उभरा है। डॉ. भाटी ने एक या दो नहीं, बल्कि 8 बेहद जटिल (हाई रिस्क) प्रसव मामलों में नॉर्मल डिलीवरी करवाकर न केवल मेडिकल साइंस की श्रेष्ठता सिद्ध की है, बल्कि पीढित परिवारों के चेहरों पर मुस्कान भी लौटाई है।

यह खबर उन तमाम परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो बडे अस्पतालों के चक्कर काटकर निराश हो चुके थे। जहाँ अन्य अस्पतालों ने हाथ खडे कर दिए, वहाँ डॉ. भाटी ने अपने अनुभव और सेवाभाव से असंभव को संभव कर दिखाया।
जब हर दरवाजे से मिली निराशा, तब भारती हॉस्पिटल बना सहारा इन 8 मामलों में सबसे बडी चुनौती यह थी कि अधिकांश मरीजों को जिला स्तर के बडे अस्पतालों ने ऑपरेशन (सिजेरियन) की सलाह दे दी थी। परिजनों के मन में डर था, लेकिन डॉ. भाटी के सटीक निदान और धैर्य ने इन माताओं को नॉर्मल डिलीवरी का सुख दिया।

इन 8 माताओं की गूंजी किलकारियां, डॉ. भाटी ने बचाई जान:
- गवरी देवी (निवासी सिलोइया, सिरोही): इन्हें सिरोही अस्पताल में साफ तौर पर सिजेरियन ऑपरेशन के लिए कह दिया गया था, लेकिन यहाँ नॉर्मल डिलीवरी हुई।
- श्रीमती सूर्या मेघवाल (पत्नी श्री प्रेमारामजी मेघवाल, निवासी बालदा, सिरोही): इन्हें भी सिरोही जिला अस्पताल में ऑपरेशन की सलाह दी गई थी।
- संगीता देवी (पत्नी जितेंद्र जी हीरागर, निवासी सूरजवाडा, जालौर): जालौर हॉस्पिटल ने हाथ खडे कर ऑपरेशन ही एकमात्र रास्ता बताया था।
- श्रीमती रेखा मीणा (पत्नी श्री नारायण लालजी मीणा, निवासी कोटडा, उदयपुर): उदयपुर के सुदूर आदिवासी क्षेत्र से आने के बावजूद यहाँ सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी करवाई गई।
- श्रीमती लासी देवी (पत्नी श्री जीवारामजी चौधरी, निवासी अनापुर, सिरोही): भीनमाल के निजी अस्पतालों ने सिजेरियन का बोल दिया था।
- श्रीमती ज्योत्सना देवी (पत्नी श्री करसन कुमारजी मेघवाल, निवासी सिरोडकी, सिरोही): भीनमाल में ऑपरेशन की सलाह मिलने के बाद यहाँ आए और नॉर्मल डिलीवरी हुई।
- श्रीमती रतन कुंवर (पत्नी श्री राजूसिंहजी, निवासी माउंट आबू): आबुरोड हॉस्पिटल में सिजेरियन बताया गया था, जिसे यहाँ नॉर्मल करवाया गया।
मौत के मुंह से बाहर आई लीला देवी: एक अद्भुत केस स्टडी इन सभी में सबसे चुनौतीपूर्ण और भावुक कर देने वाला मामला श्रीमती लीला देवी (पत्नी श्री कन्हैया लाल जी भील, निवासी आकुना, सिरोही) का था। लीला देवी की स्थिति अत्यंत नाजुक थी। शरीर में खून (हीमोग्लोबिन) मात्र 4 ग्राम बचा था। पूरा शरीर सूजन से ग्रस्त था और ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर पर था। मेडिकल भाषा में इसे 'प्री-इक्लैंप्शिया' (Pre-eclampsia) कहा जाता है, जिसमें माँ और बच्चे दोनों की जान को 100% खतरा रहता है।

प्रसव पीडा शुरू होने पर परिजन पहले जसवंतपुरा ले गए, वहाँ से सिरोही रेफर किया गया। सिरोही से भी स्थिति बिगडती देख पाली या उदयपुर जाने को कहा गया। हताश परिजन मरीज को लेकर सीधे रेवदर के भारती हॉस्पिटल पहुंचे। यहाँ डॉ. भाटी ने रिस्क लिया। तुरंत 4 यूनिट खून चढाया गया और अथक प्रयासों के बाद माँ और बच्चे दोनों को सुरक्षित बचाया। यह केवल इलाज नहीं, बल्कि ईश्वर का चमत्कार और डॉक्टर की तपस्या थी।

विश्वास की जीत भारती हॉस्पिटल एवं सोनोग्राफी सेंटर ने यह साबित कर दिया है कि अगर डॉक्टर में हुनर और दिल में मानवता हो, तो बडी से बडी मेडिकल चुनौती को भी हराया जा सकता है। डॉ. भाटी का यह प्रयास पूरे रेवदर और सिरोही क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।







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