उपेक्षा से आक्रोशित 100 से अधिक डेयरी सहायकों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन; सीएम, एनडीडीबी व श्रम विभाग से लगाई गुहार
रेवदर (सिरोही)। आशा महिला मिल्क प्रोड्यूसर प्राइवेट लिमिटेड, उदयपुर के तानाशाही रवैये और उपेक्षा के विरोध में रेवदर व जालौर जिले के डेयरी सहायकों ने आर-पार की जंग छेड़ दी है। कंपनी प्रबंधन द्वारा बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद मांगों पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने से नाराज करीब 100 दूध संकलन सहायकों ने 10 तारीख से संपूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है।
सहायकों ने बताया कि उन्होंने 18 जुलाई को अपनी जायज और लंबित मांगों को लेकर कंपनी प्रबंधन को ज्ञापन सौंपा था। उस समय प्रबंधन ने पहले 30 जुलाई और फिर 13 अगस्त तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का भरोसा दिलाया था। हालांकि तय समयसीमा बीत जाने के बाद भी कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया।
एसडीएम के जरिए सीएम व एनडीडीबी को भेजा ज्ञापन
लगातार मिल रही उपेक्षा से त्रस्त सहायकों ने रेवदर उपखंड अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। सहायकों ने मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार, श्रम आयोग और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और कंपनी की कार्यप्रणाली से अवगत कराया।
9 तक समाधान नहीं तो 10 को पूर्ण चक्काजाम
डेयरी सहायकों ने सख्त अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि 9 तारीख तक उनकी मांगों पर कोई ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो 10 तारीख की सुबह से रेवदर और जालौर क्षेत्र के सभी दूध संकलन केंद्र एक साथ बंद कर दिए जाएंगे। दूध संकलन ठप होने से होने वाले किसी भी प्रकार के वित्तीय व व्यवस्थागत नुकसान की पूरी जिम्मेदारी केवल आशा महिला मिल्क प्रोड्यूसर प्रा. लि. (उदयपुर) प्रबंधन की होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ये रहे उपस्थित
इस दौरान संगठन अध्यक्ष बाबू सिंह (राजीकावास), आला राम, लाखाराम, भोणा राम, मावा राम, कल्याण सिंह, जितेंद्र सहित दोनों जिलों के बड़ी संख्या में दूध संकलन सहायक उपस्थित रहे।









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