भीनमाल/सांचौर
जलदाय विभाग सांचौर खंड में करोड़ों रुपये की लागत से प्रस्तावित ट्यूबवैल खुदाई योजना में नियमों की धज्जियां उड़ाने का गंभीर प्रकरण सामने आया है। वर्ष 2025-26 में नए ट्यूबवैल खोदने के लिए निविदा प्रक्रिया अपनाई गई, परंतु विभागीय अधिकारियों ने पारदर्शिता व निष्पक्षता को पूरी तरह ताक पर रखते हुए मनमाने ढंग से निविदाओं का निस्तारण किया।
निविदा में अनियमितता का सिलसिला
विभाग की ओर से निविदा संख्या-04/2025-26 जारी की गई, जिसकी अनुमानित लागत ₹1 करोड़ 5 लाख निर्धारित की गई थी। इसके लिए 3 जून 2025 को निविदा जमा करने की अंतिम तिथि रखी गई थी। कुल चार फर्मों ने निविदा प्रक्रिया में भाग लिया तथा सभी ने निर्धारित शुल्क व आवश्यक दस्तावेज जमा कर निविदा पात्रता सुनिश्चित की।

किन्तु 13 जून को विभाग द्वारा तीन निविदाओं को एकतरफा निर्णय से निरस्त कर केवल एक फर्म को ही पात्र मानते हुए ठेका प्रदान कर दिया गया। इस निर्णय की सूचना मिलने पर तीनों निविदाकर्ता फर्मों ने अधिकारियों से लिखित व मौखिक स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन अधीक्षण अभियंता की ओर से कोई संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया। कभी तकनीकी कमी का हवाला दिया गया, तो कभी कागजात अपूर्ण बताए गए, जबकि निविदाकर्ताओं का दावा है कि उनके सभी दस्तावेज विधिवत पूरे थे।
कानूनी एवं प्रशासनिक पहलू
निविदा प्रक्रिया सार्वजनिक धन के व्यय से संबंधित होती है और इसके संचालन में राजस्थान सार्वजनिक खरीद नियमावली एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के प्रावधान लागू होते हैं।
नियम स्पष्ट कहते हैं कि—
- प्रत्येक पात्र निविदाकर्ता को निष्पक्ष अवसर दिया जाएगा।
- किसी भी निविदा को निरस्त करने का कारण लिखित में बताना अनिवार्य होगा।
- प्रक्रिया में भेदभाव या पूर्वाग्रह सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्यवाही की जा सकती है।
यदि शिकायतकर्ता अपनी बात को साक्ष्य सहित प्रस्तुत कर देते हैं, तो यह प्रकरण भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-13 (भ्रष्ट आचरण के अपराध) के अंतर्गत कार्रवाई योग्य बन सकता है।
पूर्ववर्ती विवाद भी आए सामने
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित अधीक्षण अभियंता पूर्व में भी जिस-जिस खंड में नियुक्त रहे हैं, वहां निविदा प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के कई प्रकरण प्रकाश में आ चुके हैं। इस कारण विभागीय छवि को आघात पहुंचा है, परंतु ऊंची पहुंच के कारण ऐसे अधिकारी बार-बार प्रभावशाली पदस्थापन प्राप्त कर लेते हैं।
निविदाकर्ताओं ने की यह मांग
तीनों वंचित निविदाकर्ताओं ने मुख्यमंत्री, जलदाय विभाग के मुख्य अभियंता, जिला कलेक्टर तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के महानिदेशक को ज्ञापन प्रेषित कर निविदा को निरस्त करने एवं समग्र प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि न्याय नहीं मिला, तो न्यायालय की शरण लेंगे।
निविदाकर्ता छगाराम सांखला का बयान
“हमने सभी दस्तावेज समय सीमा में विधिवत प्रस्तुत किए थे। लेकिन विभाग ने जानबूझकर हमें प्रक्रिया से बाहर कर मनचाही फर्म को ठेका दिया। यह भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है। यदि जांच नहीं हुई, तो हम न्यायालय में वाद दायर करेंगे।”
मुख्य बिंदु संक्षेप में
- निविदा संख्या: 04/2025-26
- लागत: ₹1.05 करोड़
- निविदा जमा तिथि: 3 जून 2025
- निविदा निरस्तीकरण तिथि: 13 जून 2025
- कुल फर्में: 4
- मान्य फर्म: केवल 1
- शिकायतकर्ता: छगाराम सांखला एवं अन्य दो निविदाकर्ता
- मांग: निविदा निरस्तीकरण एवं उच्च स्तरीय जांच
सम्बंधित संभावित घटनाक्रम
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस निविदा प्रकरण को लेकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी प्रारंभिक रिपोर्ट तलब की है। यदि प्रथम दृष्टया गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो एसीबी द्वारा प्रारंभिक जांच कर दोषियों पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।
यह प्रकरण विभागीय पारदर्शिता और जवाबदेही की एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है। अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता और गंभीरता दिखाते हैं।







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