अधिकारियों की सरपरस्ती में जारी है कालाबाजारी का खेल; भजनलाल सरकार की चुप्पी और कृषि मंत्री की साख पर उठे गंभीर सवाल, तस्करों के हौसले बुलंद
विशेष पड़ताल (सर्किल न्यूज नेटवर्क)
सांचौर/रानीवाड़ा/चितलवाना। सीमावर्ती क्षेत्र सांचौर, रानीवाड़ा और चितलवाना के खेतों में बोई गई फसलें आज बूंद-बूंद पानी के साथ-साथ यूरिया खाद के एक-एक कट्टे के लिए तरस रही हैं। एक तरफ जहां अन्नदाता यूरिया खाद पाने के लिए अलसुबह से ही सोसायटियों और दुकानों के बाहर लंबी-लंबी कतारों में लगने को मजबूर है, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के किसानों के हक का सब्सिडी वाला सरकारी यूरिया खुलेआम सीमा पार गुजरात के औद्योगिक शहरों में ब्लैक किया जा रहा है। कृषि विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों और खाद माफिया की साठगांठ का यह ऐसा घिनौना खेल है, जिसमें राजस्थान का किसान तो सड़क पर उतरकर रो रहा है और तस्कर और बिचौलिए ऐश काट रहे हैं।
सत्ता की बागडोर संभाले भजनलाल सरकार के दावों की हवा निकल चुकी है। ऐसा लगता है कि सरकार प्रशासन और जनता की सुध लेने के बजाय श्रावणी भजनों और आयोजनों में व्यस्त है, जिसका पूरा फायदा यह खाद माफिया उठा रहा है। उधर, कभी व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाने वाले कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का “तेवर और गर्मी” भी इस मानसूनी बरसात के पानी में धुलती नजर आ रही है। अगर समय रहते इन कालाबाजारियों पर कठोर कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो सीमावर्ती क्षेत्र का किसान उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगा।

गुजरात में पकड़ा गया राजस्थान के यूरिया का बड़ा जत्था: थराद पुलिस का बड़ा पर्दाफाश
राजस्थान से गुजरात भेजे जा रहे खाद के इस काले कारोबार की पोल हाल ही में गुजरात के बनासकांठा जिले की थराद पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने खोल दी है। गुजरात-राजस्थान सीमा पर स्थित वांतडाऊ भारतमाला पुलिस चेकपोस्ट पर चेकिंग के दौरान राजस्थान की तरफ से आ रहे एक संदिग्ध ट्रक (रजिस्ट्रेशन नंबर: RJ-19-GL-3693) को रोका गया।

जब थराद पुलिस और कृषि अधिकारियों ने ट्रक चालक से बिल, बिल्टी और ई-वे बिल मांगे, तो वह फर्जी और असंतोषजनक दस्तावेज पेश करने लगा। इसके बाद जब गहराई से जांच की गई और ट्रक को खोला गया, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए।

815 कट्टे जब्त: सरकारी खाद को ‘सफेद थैलियों’ में बदलकर बना दिया ‘इंडस्ट्रियल ग्रेड’
जांच में ट्रक से कुल 815 कट्टे (थैलियां) नीम कोटेड सब्सिडी युक्त यूरिया खाद बरामद की गई। तस्करों ने चोरी और धोखाधड़ी का ऐसा नायाब तरीका अपनाया था:
- पैकिंग बदलना: 815 कट्टों में से करीब 300 कट्टे सरकारी कंपनियों (कृभको, चंबल, इफको) की पीली सब्सिडी वाली थैलियों से निकालकर बिना किसी लोगो वाली सफेद थैलियों (Plain White Bags) में भर दिए गए थे।
- फर्जी दस्तावेज: वॉट्सऐप (WhatsApp) के जरिए फर्जी ई-वे बिल (E-Way Bill) और बिल्टी तैयार की गई थी, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके कि यह कृषि यूरिया नहीं बल्कि औद्योगिक उपयोग का “टेक्निकल ग्रेड यूरिया” है।
- औद्योगिक उपयोग के लिए बिक्री: किसानों के लिए 266 रुपये में मिलने वाले इस सरकारी सब्सिडी वाले खाद को मोरबी (गुजरात) की सिरामिक और इंडस्ट्रियल इकाइयों को ऊंचे दामों में बेचकर मोटा मुनाफा कमाने की साजिश थी।
गांधीनगर प्रयोगशाला में नमूनों (Samples) की जांच के बाद यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि यह खाद पूरी तरह से किसानों के उपयोग वाला सरकारी सब्सिडी युक्त नीम कोटेड यूरिया ही था।
कौभांड (घोटाले) में शामिल मुख्य आरोपियों के नाम व पते
थराद पुलिस ने इस अंतरराष्ट्रीय खाद तस्करी के मामले में एफआईआर दर्ज कर चालक को हिरासत में लिया है। इस मामले में संलिप्त मुख्य आरोपी निम्नलिखित हैं:
- ओमप्रकाश जयकिशन हरमलजी बिश्नोई (निवासी: सुरायचन्द, तहसील सांचौर, राजस्थान) – ट्रक चालक एवं परिवहनकर्ता
- प्रकाश मोहनलाल बिश्नोई (निवासी: सांचौर, राजस्थान) – जिसने ट्रक में खाद भरवाने की मुख्य भूमिका निभाई
- कमल जोगाराम हुडी (निवासी: नागौर, राजस्थान) – गोदाम से अवैध खाद लोड कराने वाला सप्लायर
- अज्ञात खरीदार / माफिया – मोरबी (गुजरात) का वह उद्योगपति/व्यापारी जिसने भारी मात्रा में यह अवैध खाद मंगवाई थी
चोरी और तस्करी का ‘मास्टर मोडस ऑपरेंडी’
- स्थानीय सोसायटियों से हेराफेरी: नागौर और सांचौर के स्थानीय खाद डीलरों व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी कोटे का यूरिया कागजों में किसानों को वितरित दिखाकर गोदामों में डंप किया जाता है।
- री-पैकिंग का खेल: रात के अंधेरे में सरकारी थैलियों को फाड़कर यूरिया को बिना ब्रांड वाली साधारण सफेद थैलियों में भरा जाता है ताकि पुलिस या उड़नदस्ते को शक न हो।
- डिजिटल फर्जीवाड़ा: वॉट्सऐप के जरिए फर्जी इंडस्ट्रियल ई-वे बिल और बिल्टी मंगवाकर ट्रक ड्राइवर को दी जाती है।
- गुजरात सप्लाई: रात के समय भारतमाला एक्सप्रेसवे या चोर रास्तों से होकर इस खाद को मोरबी की फैक्ट्रियों में 1500 से 2000 रुपये प्रति कट्टा की दर से सप्लाई किया जाता है।
सर्किल न्यूज की चेतावनी: अन्नदाता के सब्र का बांध टूटा तो भारी पड़ेगा!
सांचौर, रानीवाड़ा और चितलवाना के किसान आज खाद के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। जब राज्य में नई सरकार बनी थी, तब कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने माफियाओं के खिलाफ कड़े कदम उठाने का दावा किया था, लेकिन आज सीमावर्ती जिलों में अधिकारी और तस्कर बेखौफ होकर किसानों का हक मार रहे हैं।
यदि राजस्थान सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से:
- दोषी कृषि अधिकारियों को निलंबित नहीं किया,
- खाद ब्लैक करने वाले डीलरों के लाइसेंस रद्द कर उन पर रासुका (NSA) और आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत कड़ी कार्रवाई नहीं की,
…तो सांचौर की सड़कों पर उतरने वाला किसान आंदोलन पूरे राज्य में आग की तरह फैलेगा। सरकार और प्रशासन को यह अंतिम चेतावनी है कि भजनों के साथ-साथ धरातल पर तड़पते किसान की पुकार सुनें और इस यूरिया माफिया के गढ़ को समूल नष्ट करें!



