रेवदर (सिरोही)। जहाँ एक ओर सरकारी और बड़े निजी अस्पतालों में छोटी-छोटी जटिलताओं पर भी तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दे दी जाती है, वहीं रेवदर स्थित भारती हॉस्पिटल एवं सोनोग्राफी सेंटर ने सामान्य प्रसव को बढ़ावा देकर मानवता की मिसाल पेश की है। अस्पताल के अनुभवी डॉक्टरों की टीम ने उन कई गर्भवती महिलाओं को सफल नॉर्मल डिलीवरी कराई, जिन्हें प्रदेश के बड़े अस्पतालों में सिजेरियन के लिए 'अनिवार्य' बताकर रेफर कर दिया गया था। परिजनों का भरोसा और डॉक्टरों की विशेषज्ञता का यह अनूठा संगम, क्षेत्र की महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है।

यह हैं कुछ जटिल मामलों में नॉर्मल डिलीवरी के उदाहरण:
- पिछला सिजेरियन था, फिर भी मिली नॉर्मल डिलीवरी में सफलता: वेरा रामपुरा निवासी सपना कुँवर (पत्नी भवानी सिंह राजपूत) की पहली डिलीवरी सिजेरियन से हुई थी। पीहर सोजत (पाली) होने के कारण उन्होंने सोजत के सरकारी और निजी, तथा शिवगंज के एक बड़े अस्पताल में दिखाया। सभी जगह उन्हें दूसरा प्रसव भी सिजेरियन से ही होने की सलाह दी गई। लेकिन परिजनों ने भारती हॉस्पिटल पर विश्वास जताया, और डॉक्टरों की टीम ने उनकी उम्मीदों पर खरा उतरते हुए, तुरंत ही सफल नॉर्मल डिलीवरी करवाई और मानवता का परिचय दिया।

- रात भर बड़े अस्पताल में भर्ती, सुबह ऑपरेशन की सलाह: दौलपुरा निवासी श्रीमती संगीता देवी (पत्नी श्री लाखारामजी कोली) को शादी के 7 वर्षों बाद गर्भधारण हुआ। प्रसव पीड़ा के समय स्थानीय अस्पतालों से आबूरोड के एक बड़े अस्पताल ले जाया गया, जहाँ रात भर भर्ती रहने के बावजूद डिलीवरी नहीं हुई और सुबह सिजेरियन ऑपरेशन का बोल दिया गया। परिजन ऑपरेशन नहीं चाहते थे। तब एक रिश्तेदार की सलाह पर वे सीधे भारती हॉस्पिटल पहुँचे, जहाँ डॉक्टरों ने तुरंत नॉर्मल डिलीवरी करवाकर माँ और बच्चे को राहत दी।
- मेडिकल कॉलेज अस्पताल को बाइपास कर सीधे पहुँचे रेवदर: पाड़ीव निवासी गीता कुमारी (पत्नी श्रवण कुमार मेघवाल) ने सिरोही के मेडिकल कॉलेज अस्पताल को बाइपास करते हुए सीधा भारती हॉस्पिटल एवं सोनोग्राफी सेंटर रेवदर का रुख किया। यहाँ उनकी भी बिना चीरा, बिना टाँका नॉर्मल डिलीवरी करवाकर राहत पहुँचायी गई।
- 10 वर्ष बाद गर्भवती हुई महिला को भी मिली खुशी: जालौर जिले के हरजी निवासी दिलशाना बानो (पत्नी अनवर ख़ान) शादी के 10 वर्षों बाद गर्भवती हुई थीं। भारती हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने उनकी भी नॉर्मल डिलीवरी करवाकर उनके परिवार में खुशियाँ भर दीं।
- प्लेट्लेट कम होने पर उदयपुर रेफर, पर भरोसा काम आया: गुड़ा नवारा निवासी दिवा कुमारी (पत्नी सुरेशजी माली) का 9 महीने तक सिरोही के सबसे बड़े हॉस्पिटल में इलाज चला रहा था। प्लेट्लेट कम होने के कारण सिरोही के अनुभवी विशेषज्ञ ने माँ व बच्चे की जान को खतरा बताते हुए उन्हें उदयपुर के लिए रेफर कर दिया। लेकिन परिजनों ने भारती हॉस्पिटल पर पूरा भरोसा किया। अस्पताल की टीम ने उनके इस भरोसे को कायम रखा और ऐसे जोखिम भरे मामले में भी नॉर्मल डिलीवरी करवाकर एक बार फिर मानवता का परिचय दिया।
लिहाजा
भारती हॉस्पिटल एवं सोनोग्राफी सेंटर की यह सफलता सिद्ध करती है कि डिलीवरी के मामलों में केवल जल्दबाजी में ऑपरेशन करना ही समाधान नहीं है। चिकित्सा विज्ञान में विशेषज्ञता के साथ-साथ मरीजों के प्रति सहानुभूति और भरोसा भी बहुत मायने रखता है। यह अस्पताल सिर्फ उपचार नहीं दे रहा, बल्कि महिलाओं को सुरक्षित और सामान्य प्रसव के माध्यम से मातृत्व का स्वाभाविक सुख प्रदान कर रहा है, और इस प्रकार चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम कर रहा है।







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