रेवदर स्थित भारती हॉस्पिटल व सोनोग्राफी सेंटर ने एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता और समर्पण का लोहा मनवाते हुए चिकित्सा जगत में नई मिसाल कायम की है। हॉस्पिटल न केवल नॉर्मल डिलीवरी करवाने में प्रसिद्ध है, बल्कि सर्पदंश और जहर खाए हुए मरीजों के सफल इलाज के लिए भी जाना जाता है, जहाँ अब तक हजारों लोगों की जान बचाई जा चुकी है।
दहशत के माहौल में बनी उम्मीद की किरण
हाल ही में क्षेत्र में सर्पदंश से मौतों की खबर (कालंद्री, धनपुरा, पुनावा) के बाद लोगों में दहशत का माहौल था। सिरोही के बड़े अस्पताल में रेफर किए गए एक स्कूली बच्चे की मौत होने के बाद लोगों का बड़े चिकित्सा संस्थानों पर से भरोसा उठ गया था। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में, भारती हॉस्पिटल ने अपनी काबिलियत साबित करते हुए लोगों में उम्मीद की किरण जगाई है।
क्रेट सर्पदंश के तीन मरीजों की जान बचाई
हॉस्पिटल ने एक ही रात में अत्यंत जहरीले क्रेट सांप के डसे हुए तीन मरीजों की जान बचाकर मानवता का परिचय दिया है। रात के समय सर्पदंश का शिकार हुए तीनों मरीज थे:
- ममता कुमारी पुत्री भारमल जी चौधरी, निवासी आमलारी
- मीरा देवी पत्नी मुकेश कुमार ग्रासिया, हाल निवासी सिरोड़ी
- लक्ष्मी देवी पत्नी पदमा रामजी चौधरी, निवासी रोड़ा खेड़ा सिलदर
परिजनों ने बिना समय गंवाए तीनों को तुरंत रेवदर के भारती हॉस्पिटल व सोनोग्राफी सेंटर पहुँचाया। हॉस्पिटल में मौजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने तत्काल प्रभाव से ताबड़तोड़ इलाज शुरू किया और अपनी त्वरित कार्यवाही एवं अनुभव से तीनों मरीजों की जान बचा ली।
चिकित्सकों की इस तत्परता और विशेषज्ञता ने साबित कर दिया कि सही समय पर, सही जगह पर मिला इलाज जिंदगी और मौत का अंतर मिटा सकता है। हॉस्पिटल की इस सफलता से क्षेत्र के लोगों में अब गंभीर इमरजेंसी केस में स्थानीय स्तर पर ही बेहतर इलाज मिलने का विश्वास मजबूत हुआ है।







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