इंसानी जज्बे और मेडिकल कमाल की मिसाल
आबूरोड, पालनपुर और सिरोही तक भटके मरीज
हर अस्पताल ने कहा ऑपरेशन जरूरी
रेवदर में डॉक्टरों ने दिखाया हौसला
संवाददाता, रेवदर
कई बार जिंदगी ऐसे मोड़ पर आकर खड़ी हो जाती है, जब उम्मीदें भी जवाब देने लगती हैं। बड़े-बड़े अस्पतालों के नाम, लाखों रुपये की जांचें, ऑपरेशन की अनिवार्यता और डराते डॉक्टर... ऐसे में एक छोटा-सा अस्पताल, डॉक्टरों की अनुभवी टीम और इंसानियत की मिसाल, न सिर्फ मरीजों की जान बचाती है, बल्कि पूरे परिवार को राहत और भरोसा भी देती है। रेवदर का भारती हॉस्पिटल इन दिनों ऐसे ही कई मामलों में उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है।

काछौली (पिंडवाड़ा) निवासी ललिता कुमारी पत्नी कमलेश कुमार चौधरी की पहली डिलीवरी थी। खून मात्र 7 ग्राम और पेल्विक हड्डियों में जगह कम होने के कारण आबूरोड के अस्पताल में डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दी। परिवार परेशान था, लेकिन किसी रिश्तेदार के कहने पर वे सीधे भारती हॉस्पिटल एवं सोनोग्राफी सेंटर, रेवदर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने न सिर्फ नॉर्मल डिलीवरी करवाई, बल्कि परिवार को राहत की सांस भी दी। ललिता और उसके परिजनों ने डॉक्टरों का आभार जताया।
दूसरा मामला सवली तहसील शिवगंज निवासी पारू कुमारी पत्नी किशोर कुमार प्रजापत का है। पारू का इलाज पूरे 9 महीने सिरोही के सबसे बड़े अस्पताल में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास चला। अखापुरा निवासी लड़की के पिताजी ने बताया कि इस दौरान करीब पौने दो लाख रुपये दवा और जांच में खर्च हो गए। प्रसव पीड़ा शुरू होने पर डॉक्टर ने हाई बीपी और गर्भ में पानी की कमी बताकर तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन अनिवार्य बताया, वरना मां-बच्चे की जान का खतरा बताया। घबराए परिजन रिश्तेदारों की सलाह पर भारती हॉस्पिटल, रेवदर पहुंचे, जहां अनुभवी डॉक्टरों की टीम ने नॉर्मल डिलीवरी करवा कर परिवार को राहत दी।
मोहब्बत नगर (सिरोही) निवासी गुड़िया देवी पत्नी जितेंद्र कुमार वागरी की पहली डिलीवरी थी। गर्भ में शिशु का वजन 4.5 किलोग्राम था और पेल्विक हड्डियों में गैप कम। सिरोही के सबसे बड़े अस्पताल में सिजेरियन की सलाह मिली, आबूरोड के बड़े अस्पताल में भी रात भर भर्ती रखने के बाद ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प बताया गया।
पालनपुर के निजी अस्पताल और पाटन (गुजरात) में भी डॉक्टरों ने यही राय दी। परिजन ऑपरेशन नहीं करवाना चाहते थे। ऐसे में गुड़िया की नानी धापू बाई, जो दांतराई गांव की पूर्व सरपंच हैं, ने सलाह दी कि गुजरात में भटकने की बजाय रेवदर के भारती हॉस्पिटल चलो।
यहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने एकदम नॉर्मल डिलीवरी करवा दी। इस चमत्कारिक अनुभव के बाद परिवार ने भारती हॉस्पिटल के डॉक्टरों का आभार जताया और जमकर प्रशंसा की।

मूलिया खेड़ा निवासी जीजा कुमारी पत्नी जाना राम ग्रासिया का हीमोग्लोबिन मात्र 4 ग्राम था। क्षेत्र के दो-तीन अस्पतालों ने उन्हें बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी, लेकिन भारती हॉस्पिटल, रेवदर में डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव करवा कर उम्मीदों पर खरा उतरने का काम किया।
रोहिड़ा (पिंडवाड़ा) निवासी सारिका पत्नी मनीष कुमार प्रजापत की भी नॉर्मल डिलीवरी करवा कर भारती हॉस्पिटल ने एक बार फिर साबित किया कि सही समय पर सही इलाज और अनुभवी डॉक्टरों की टीम नामुमकिन को भी मुमकिन बना सकती है।

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भारती हॉस्पिटल क्यों है खास?
रेवदर का भारती हॉस्पिटल क्षेत्र की महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। यहां अनुभवी डॉक्टरों की टीम, अत्याधुनिक सुविधाएं और मरीजों की जान बचाने की प्राथमिकता ने कई परिवारों को राहत दी है। अस्पताल के डॉक्टर की टीम हर जटिल केस में भी सामान्य प्रसव की पूरी कोशिश करती है।
डॉक्टरों की सलाह
ऑपरेशन की सलाह पर घबराएं नहीं, विशेषज्ञ डॉक्टरों से दूसरी राय जरूर लें। नॉर्मल डिलीवरी के लिए सही समय पर अस्पताल पहुंचे। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
इन तमाम केसों ने साबित कर दिया कि उम्मीद कभी नहीं छोड़नी चाहिए। इंसानियत, प्रोफेशनलिज्म और मेडिकल साइंस का संगम—यही है भारती हॉस्पिटल, रेवदर की पहचान।
(रिपोर्ट: संवाददाता, सर्कल न्यूज़ )







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