जब संस्कृति के बीज सींचे जाते हैं, तो भविष्य की नींव मजबूत होती है। चार दिन का अनुशासन, चार दिन की प्रेरणा, और चार दिन का स्नेह मिलन। रानीवाड़ा प्रांत के जसवन्तपुरा मण्डल के उचमत में आयोजित श्री क्षत्रिय युवक संघ का प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर आज गौरवशाली विदाई के साथ संपन्न हो गया। इस शिविर ने 110 युवाओं में कर्तव्य, धर्म और संस्कृति के संरक्षण की भावना का बीजारोपण किया है।
"बीज संघ ने बोया, अब संरक्षण का दायित्व आपका है"
विदाई कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिविर संचालक ईश्वरसिंह सांगाणा ने युवाओं में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि चार दिन पूर्व इसी स्थान पर आपके भाल पर तिलक लगाकर स्वागत किया गया था और आज विदाई का समय है। उन्होंने कहा, "विदाई दुःखदायी होती है, लेकिन हमें निराश होने की आवश्यकता नहीं है। जो कुछ हमने संघ से सीखा, उसे संजोय रखना है।"

सांगाणा ने स्पष्ट किया कि संघ ने इन चार दिनों में जो बीजारोपण किया है, अब उसके संरक्षण का दायित्व प्रत्येक शिविरार्थी का है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि इस बीज को समय-समय पर खाद, पानी देने के लिए संघ की नियमित शाखाओं व शिविरों में जाते रहें। उन्होंने कहा, "जब कभी आपको लगे कि संघ ने जो ऊर्जा दी थी, उसमें कमी आ रही है, तो पुनः इस प्रकार के मेलों (शिविरों) में आते रहें। संघ पुनः इस प्रकार का अभ्यास करवाएगा।"
संस्कृति और मातृशक्ति का गौरव
शिविर के दौरान आयोजित स्नेह मिलन में जसवन्तपुरा मण्डल के समाज बंधुओं की उपस्थिति रही। संभाग प्रमुख अर्जुनसिंह देलदरी ने युवाओं में क्षात्र धर्म का बोध कराते हुए कहा कि आदिकाल से इतनी महान संस्कृति व परम्परा कैसे मिट सकती है?
उन्होंने गौरवपूर्ण इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा, "वो कौम न मिट पायेगी जिसमें भगवान स्वयं अवतार लेते हैं। जिस कौम के इतिहास में पुरुषों की तुलना में मातृशक्ति भी एक से एक बढ़कर उदाहरण पेश किए, जिसका कोई सानी नहीं है, वो कौम कैसे मिट सकती है!" उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ भी इसी कर्त्तव्य पालन की बात करता है।

इन 110 युवाओं ने लिया संकल्प
इस प्रेरणादायी शिविर में डोरंडा, जाविया, चेकला, करोला, डुंगरी, कागमाला, जाखड़ी, पादर, टुआ, तेजावास, सवणा, निम्बज, उचमत, पुरण, कोलर आदि गाँवों के 110 शिविरार्थियों ने भाग लेकर क्षात्र धर्म के संरक्षण का संकल्प लिया।
शिविर की समस्त व्यवस्था समस्त राजपूत समाज उचमत द्वारा संभाली गई।
इनकी उपस्थिति रही खास
कार्यक्रम में पूर्व विधायक रानीवाड़ा नारायणसिंह देवल की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इस अवसर पर हरीसिंह केसुआ, महेन्द्रपालसिंह चेकला, दुर्जनसिंह गजापुरा, देवेन्द्रसिंह जाविया, गोविन्दपालसिंह गजापुरा, देवीसिंह पादर, नरेन्द्रसिंह नवोदय, नरपतसिंह, महेन्द्रसिंह देवडा, भंवरसिंह जीतपुरा, केशरसिंह जीतपुरा, पुरणसिंह हडमतिया, भगवानसिंह चेकला, गब्बरसिंह कलापुरा, गोपालसिंह चेकला, दलपतसिंह केसुआ, दीपसिंह वाडा, अमरसिंह उचमत, दलपतसिंह उचमत, विक्रमसिंह उचमत, कल्याणसिंह, उकसिंह, लालसिंह, सुरेन्द्रसिंह, ईश्वरसिंह, गुलाबसिंह, महेन्द्रसिंह, मोडसिंह, भगवतसिंह, गोपालसिंह उचमत, गणपतसिंह पुर, रेवन्त सिंह जाखड़ी, भगवतसिंह जाखड़ी, समुद्रसिंह जाविया, मुकनसिंह चेकला, दशरथसिंह उचमत, भरत सिंह चेकला, विजय सिंह डुंगरी, नारायण सिंह डुंगरी और देरावरसिंह उचमत सहित बड़ी संख्या में समाज बंधु मौजूद रहे।







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