जसवंतपुरा: श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक और समाज को नई दिशा देने वाले युगपुरुष पूज्य तन सिंह जी की पुण्यतिथि के अवसर पर 7 दिसंबर (रविवार) को जसवंतपुरा उपखंड के डोरडा गांव में एक विशाल सामूहिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि सभा होगी, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायी संगम भी साबित होगा।
डोरडा में होगा रानीवाड़ा प्रांत का महासंगम डोरडा शाखा प्रमुख गोपाल सिंह डोरडा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह कार्यक्रम रानीवाड़ा प्रांत का 'सामूहिक कार्यक्रम' है, जिसे चारभुजा शाखा डोरडा में आयोजित किया जाएगा।
- समय: रविवार दोपहर 2:15 बजे।
- स्थान: चारभुजा शाखा, डोरडा (जसवंतपुरा)।
- सहभागिता: इस कार्यक्रम में जसवंतपुरा मंडल की विभिन्न शाखाओं से बड़ी संख्या में बालक, बालिकाएं, गणवेशधारी स्वयंसेवक, समाज बंधु और मातृशक्ति (महिलाएं) भाग लेंगी।
कौन थे पूज्य तन सिंह जी? स्वर्गीय तन सिंह जी (बाड़मेर) न केवल एक राजनेता थे, बल्कि एक महान दार्शनिक, लेखक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने दो बार बाड़मेर से सांसद रहते हुए देश की संसद में अपनी बेबाक आवाज उठाई थी। लेकिन, उनका सबसे बड़ा योगदान 'श्री क्षत्रिय युवक संघ' की स्थापना था। उन्होंने देखा कि समाज दिशाहीन हो रहा है, इसलिए उन्होंने 1946 में इस संगठन की नींव रखी। उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि एक ऐसे 'इंसान' का निर्माण करना था जो चरित्रवान, अनुशासित और समाज के लिए समर्पित हो। उन्हें उनके अनुयायी आदर से 'पूज्य' और 'मनीषी' कहकर संबोधित करते हैं।
क्या है 'श्री क्षत्रिय युवक संघ'? जिस संस्था के बैनर तले यह कार्यक्रम हो रहा है, वह पिछले 75 वर्षों से भी अधिक समय से मौन तपस्या कर रही है।
- कार्यप्रणाली: यह संस्था किसी प्रचार-प्रसार के बिना 'शाखा' पद्धति के माध्यम से काम करती है। इसमें खेल और चर्चाओं के माध्यम से बालकों और युवाओं में संस्कार (Values) और अनुशासन (Discipline) के बीज बोए जाते हैं।
- उद्देश्य: संघ का मूल मंत्र है— "संघे शक्ति कलियुगे"। यह संस्था व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की बात करती है। यहाँ ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाकर सबको एक जाजम (दरी) पर बैठाया जाता है।
- प्रभाव: आज राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में लाखों स्वयंसेवक इस विचारधारा से जुड़े हैं, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
7 दिसंबर का यह दिन संघ के स्वयंसेवकों के लिए एक संकल्प दिवस की तरह है, जहाँ वे अपने प्रेरणास्रोत को याद कर उनके दिखाए मार्ग पर चलने का प्रण लेंगे।







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