सिरोही। श्री पावापुरी तीर्थ जीव मैत्रीधाम की 25 वीं वर्षगांठ पर आचार्य श्री उदयवल्लभसूरीजी और हृदयवल्लभसूरीजी महाराज की निश्रा में धूमधाम व हर्षाेल्लास के साथ मूलनायक भगवान शंखेश्वर पार्श्वनाथ, चौमुखा महावीर स्वामी एवं अन्य 16 देहरियों पर 25 वीं ध्वजा विधिविधान के साथ फहराई गई। शंखेश्वर पार्श्वनाथ जिनालय पर आचार्य उदयवल्लभसूरीजी महाराज ने ध्वजा पर वाक्षेप डाला ओर के पी संघवी परिवार के प्रमुख किशोर-सुधा बेन, रतन बेन बी. संघवी, अमरीश-मेघना बेन, सुश्री रूतवी ए. शाह, अमिश-सोनाली शाह, समीर-रचना बेन ने दण्ड व कलश की पूजा की। चौमुखा जल मंदिर पर कीर्ति भाई, नितिन-सोनल बेन, अरविंद-हीना बेन, एवं दिलीप-रूपल बेन ने ध्वजा फहराई। अन्य देहरियों व गुरू मंदिरो पर संघवी परिवार के रिश्तेदारों एवं ट्रस्ट मंडल के ट्रस्टियों ने ध्वजा फहराई।
ध्वजा का वरघोडा प्रातः 9 बजे गाजते बाजते जिनालय पहुंचा, जहां पर विधिकारक समकित भाई शाह ने सतरभेदी पूजा पढाई ओर ध्वजा को सिर पर रखकर सभी ने मंदिर की तीन प्रदक्षिणा देकर ओम पुण्यांम-पुण्यांत-प्रियमताम-प्रियमताम के मंत्रो के साथ ध्वजा विधि की।

आचार्य श्री उदयवल्लभसूरीजी ने ध्वजा के बाद हित शिक्षा देते हुए कहा कि परमात्मा एक पावर सेक्टर हैं, परमात्मा बोलते नही हैं लेकिन वे सब देखते हैं ओर जो श्रद्धालु समर्पण के साथ जप-तप व आराधना करते हैं उनको बडी शक्ति प्रदान करते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि व्यक्ति के जीवन काल में कब केसा परिर्वतन होता हैं कहा नही जा सकता हैं लेकिन उसके कर्माे का फल उसे जरूर मिलता हैं।
समाधि मंदिर का हुआ शिलान्यास
पावापुरी में देवलोक हुए आचार्यश्री मेघवल्लभसूरीजी के समाधि मंदिर का शिलान्यास बुधवार सुबह प्रातः वेला में आचार्यश्री उदयवल्लभसूरीजी म. सा. की निश्रा में हुआ। विधि विधान के साथ पहले समाधि स्थल के पास स्नात्र पूजन हुआ। मुख्यशिला के पी संघवी परिवार के सदस्यों ने रखी व दूसरी शिला कीर्तिभाई-अरूणा बेन ने तीसरी शिला गजराबेन गिरधरलाल जीवनलाल परिवार मुंबई एवं कल्याण मित्र रमेश भाई, विनयचंद, हर्ष भाई, विरलभाई इत्यादि ने, चौथी शिला पावापुरी के ट्रस्टीयों ने, एवं पांचवी समकित मंडल अहमदाबाद के युवान, रोहन भाई एवं प्रशांत भाई इत्यादि ने रखी। शिलान्यास के पूर्व ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं अन्य भक्तजन गाजते-बाजते चर्तुविद संघ के साथ समाधि स्थल पर पहुंचे।
पावापुरी तीर्थ में उपधान तप की हुई घोषणा
आचार्यश्री ने इस अवसर पर कहा कि मंजूलाबेन रमणलाल वाडीलाल शाह आंनद मंगल परिवार चाणस्मा वालो की तरफ से पावापुरी तीर्थ में 43 दिवसीय उपधान यानि साधु जीवन का प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया हैं। इसमें श्रावक-श्राविकाओं को 42 दिन तक साधु जीवन की तरह तप-जप-आराधना करनी हैं और अपने जीवन में त्याग की भावना को मजबुत बनाना हैं। उपधान के लिए फार्म ऑनलाईन एप के माध्यम से भरने की शुरूआत आज की गई। उपधान लाभार्थी परिवार के मालु भाई शाह ने उपधान के लिए आमंत्रण दिया।







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