जालोर, 10 सितंबर 2025 (सर्कल न्यूज़ नेटवर्क): जालोर जिले के जसवंतपुरा उपखंड के राजपुरा चौराहे पर राणा पूंजा भील की मूर्ति स्थापना का मामला गरमा गया है। आज सैकड़ों की संख्या में आदिवासी भील समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर उपखंड अधिकारी को एक कड़ा ज्ञापन सौंपा, जिसमें अपनी मांगें पूरी न होने पर बड़े आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी गई।
क्या है पूरा मामला? आदिवासी समुदाय लंबे समय से जसवंतपुरा के राजपुरा चौराहे पर राणा पूंजा भील की मूर्ति स्थापित करने की मांग कर रहा है। राणा पूंजा, जिन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी, को आदिवासी समाज अपना गौरव मानता है। लेकिन, समुदाय का आरोप है कि उनकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, और राजनीतिक दबाव में प्रशासन निष्क्रिय बना हुआ है।

संवैधानिक अधिकारों का हवाला आदिवासी समुदाय ने अपने ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 25 का हवाला दिया है, जो समानता और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देते हैं। उन्होंने कहा कि राणा पूंजा भील की मूर्ति स्थापना का यह मुद्दा सिर्फ एक मूर्ति का नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की गरिमा और सांस्कृतिक पहचान का है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
आंदोलन और कानूनी कार्रवाई की धमकी
आदिवासी समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेंगे। इसके साथ ही, उन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले को कानूनी रूप से लड़ने का फैसला किया है। समुदाय ने कुछ सरकारी अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव में एकतरफा कार्रवाई करने का भी आरोप लगाया है, जिससे सामाजिक सद्भाव बिगड़ने का खतरा है।
सामाजिक सद्भाव और न्याय का सवाल यह मामला अब सिर्फ एक मूर्ति स्थापना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और सम्मान का सवाल बन गया है। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वह इस नाजुक मामले को किस तरह सुलझाता है ताकि सामाजिक शांति बनी रहे। फिलहाल सभी की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।







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