फिंगरप्रिंट सत्यापन न होने से महीनों से बंद थी मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन; आर्थिक तंगी से जूझ रही बुजुर्ग महिला के लिए शिविर बना सहारा
● शिविर प्रभारी की त्वरित संवेदनशीलता और विभागीय कार्मिकों की मुस्तैदी से मौके पर ही हुआ बायोमेट्रिक समाधान, मुख्यमंत्री का जताया आभार
जसवंतपुरा/गजापुरा। "सरकार जब खुद चलकर गरीब की चौपाल तक पहुंचती है, तो बरसों से अटके काम भी पलों में हल हो जाते हैं।" कुछ ऐसा ही भावुक और व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास जगाने वाला नजारा जसवंतपुरा पंचायत समिति की ग्राम पंचायत गजापुरा में आयोजित 'ग्रामीण सेवा शिविर' में देखने को मिला। यह शिविर गजापुरा निवासी एक असहाय बुजुर्ग महिला श्रीमती सोरम कंवर के लिए उस वक्त अंधकार में उम्मीद की नई किरण बनकर आया, जब पिछले काफी समय से बंद पड़ी उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन को प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए मौके पर ही बहाल कर दिया। पेंशन दोबारा शुरू होने की खबर सुनते ही बुजुर्ग सोरम कंवर की आंखें खुशी से छलक आईं और उन्होंने भरे गले से अधिकारियों को दुआएं दीं।
तकनीकी खामी बनी थी लाचारी, आर्थिक तंगी में गुजर रहे थे दिन दरअसल, सोरम कंवर मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजना की पात्र लाभार्थी हैं, जिससे मिलने वाली सहायता राशि से उनके बुढ़ापे का खर्च और जीवन बसर होता था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से ई-मित्र या बैंकों में फिंगरप्रिंट (बायोमेट्रिक) सत्यापन नहीं हो पाने के कारण तकनीकी वजहों से उनकी पेंशन अचानक बंद हो गई थी। उम्र के इस पड़ाव पर शारीरिक शिथिलता के कारण अंगूठे के निशान मैच न होना एक बड़ी समस्या बन गया था। पेंशन रुकने से सोरम कंवर के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया था और वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों तथा दवाइयों के लिए बेहद परेशान थीं।
शिविर प्रभारी ने दिखाई तत्परता, सामाजिक न्याय विभाग ने तुरंत लिया एक्शन परेशान सोरम कंवर जब अपनी लाचारी लेकर गजापुरा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में पहुंचीं, तो उन्होंने शिविर प्रभारी को अपनी इस पीड़ा से अवगत करवाया। बुजुर्ग महिला की आर्थिक तंगी और परेशानी को देखते हुए शिविर प्रभारी ने बिना समय गंवाए मामले पर त्वरित संज्ञान लिया। उन्होंने मौके पर ही मौजूद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों और तकनीकी कार्मिकों को बुलाकर इस समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के कड़े निर्देश दिए।
वैकल्पिक सत्यापन से मिनटों में हुआ समाधान, दूर हुई बुढ़ापे की चिंता शिविर प्रभारी के निर्देश मिलते ही विभागीय कार्मिक तुरंत एक्शन में आए। उन्होंने बायोमेट्रिक न आने की स्थिति में उपलब्ध अन्य वैकल्पिक एवं आवश्यक सरकारी प्रक्रियाओं और सत्यापन के नियमों का उपयोग करते हुए सोरम कंवर का डाटा री-वेरिफाई किया। मौके पर ही सभी जरूरी कागजी और ऑनलाइन औपचारिकताएं पूर्ण कर उनकी बंद पड़ी पेंशन को तकनीकी रूप से पुनः शुरू (बहाल) कर दिया गया। अब आगामी महीनों से उनकी पेंशन राशि सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर होना सुनिश्चित हो गई है।
मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का दिल से जताया आभार अपनी सबसे बड़ी चिंता का पल भर में समाधान होते देख लाभार्थी सोरम कंवर के चेहरे पर सुकून की मुस्कान लौट आई। उन्होंने इस त्वरित राहत के लिए मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा और जिला प्रशासन के प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि, "मुझ जैसी गरीब और अकेली महिला के लिए यह पेंशन ही सबसे बड़ा सहारा है। दफ्तरों के चक्कर काटने की हिम्मत नहीं थी, लेकिन सरकार ने गांव में ही शिविर लगाकर मेरी इतनी बड़ी चिंता दूर कर दी। अब मैं स्वाभिमान से अपना गुजर-बसर कर सकूंगी।" गजापुरा का यह शिविर आज क्षेत्र में सुशासन की एक बेहतरीन मिसाल बन चुका है।







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