6 लाख की स्वीकृति के बाद भी बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़; क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
रानीवाड़ा, जालोर। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण जालोर जिले के डूंगरी भाखरी स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में देखने को मिल रहा है। यहां दो जर्जर कक्षा-कक्ष कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं, जिनमें करीब 250 मासूम बच्चों का भविष्य और जीवन दांव पर लगा है। प्रधानाध्यापक देवाराम चौधरी ने बताया कि कई बार उच्चाधिकारियों को सूचित करने के बावजूद कार्रवाई शून्य है, जिससे बच्चों के अभिभावकों में गहरा रोष व्याप्त है।

स्वीकृति के बाद भी नहीं हुई मरम्मत, ठेकेदार पर सवालिया निशान
मामले का खुलासा करते हुए प्रधानाध्यापक देवाराम चौधरी ने बताया कि विद्यालय के पत्रांक 242 दिनांक 05.12.2023 के प्रस्ताव के अनुसार, क्षतिग्रस्त दो कक्षा-कक्षों की 'मेजर रिपेयरिंग' के लिए 6 लाख रुपये की स्वीकृति सत्र 2024-25 में जारी की गई थी। इसके अनुपालन में ठेकेदार द्वारा ग्रीष्मावकाश के दौरान कार्य भी करवाया गया, लेकिन हैरत की बात यह है कि जिन कमरों को सख्त मरम्मत की आवश्यकता थी, उनकी मरम्मत की ही नहीं गई। जब ठेकेदार से इस बारे में जानकारी ली गई, तो उसने अपनी ओर से कार्य पूर्ण होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
दीवारें, छत और नींव कभी भी हो सकती हैं जमींदोज
चौधरी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिन दो कक्षा-कक्षों की 'मेजर रिपेयरिंग' की सख्त आवश्यकता है, उनका काम न होना किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को न्योता देने जैसा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि "किसी भी समय कमरों की दीवारें, छत तथा नींव जमींदोज हो सकते हैं।" यह स्थिति न केवल बच्चों के लिए जानलेवा है, बल्कि शिक्षकों और स्टाफ के लिए भी खतरा बनी हुई है।

कई बार की शिकायतें, पर नतीजा सिफर
विद्यालय प्रशासन ने इस गंभीर विषय पर कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर सूचित किया है। जिला कलेक्टर जालोर, जिला परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा जालोर, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, रानीवाड़ा और पीईईओ डूंगरी, रानीवाड़ा को भी इसकी प्रतियां भेजी गई हैं। प्रधानाध्यापक देवाराम चौधरी ने राउ प्रा वि डूंगरी भाखरी के डाइस कोड का भी हवाला दिया, लेकिन बावजूद इसके, आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
बच्चों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा, प्रशासन की उदासीनता कब टूटेगी?
श्रीमान शिक्षा मंत्री महोदय, राजस्थान सरकार को भेजे गए पत्र में स्पष्ट निवेदन किया गया है कि "बच्चों की सुरक्षा विभाग एवं राज्य सरकार पर निर्भर है।" यह पत्र स्पष्ट रूप से बताता है कि स्थानीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक इस मामले की जानकारी है, फिर भी बच्चों की जान जोखिम में डालकर शिक्षा दी जा रही है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? संलग्न क्षतिग्रस्त भवन की तस्वीरें स्थिति की भयावहता को और पुख्ता करती हैं।
यह मामला न केवल राजस्थान के शिक्षा विभाग बल्कि पूरे सरकारी तंत्र पर सवाल उठाता है, जहां लाखों की स्वीकृति के बाद भी बच्चों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। अब देखना यह है कि शिक्षा मंत्री मदन जी दिलावर इस मामले में कब संज्ञान लेते हैं और प्रशासन की कुंभकर्णी नींद कब टूटती है, ताकि डूंगरी भाखरी के मासूम नौनिहाल सुरक्षित माहौल में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।







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