सिरोही/रेवदर। चिकित्सा जगत में कभी-कभी ऐसे सुखद संयोग बनते हैं जो न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज में सकारात्मकता का संचार कर देते हैं। राजस्थान के सिरोही जिले में एक ऐसा ही ‘अजीब संयोग’ और चिकित्सा विशेषज्ञता का मेल देखने को मिला है, जहाँ एक ही दिन में सात महिलाओं ने स्वस्थ पुत्रों को जन्म दिया। सबसे खास बात यह रही कि आधुनिक दौर में जहाँ सिजेरियन (ऑपरेशन) का चलन बढ़ रहा है, वहीं डॉ. एस.एस. भाटी के मार्गदर्शन में इन सभी सात महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी सफल रही।
खुशियों का ‘सप्तक’: घर-घर गूंजी किलकारी
इस अद्भुत संयोग ने जिले के सिरोही और रेवदर तहसील के विभिन्न गांवों में उत्सव का माहौल बना दिया है। जिन परिवारों में नन्हे मेहमानों का आगमन हुआ है, उनमें खुशी की लहर है। परिजनों ने इस सफल प्रसव के लिए डॉ. भाटी और उनकी टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया है।

इन माताओं के घर आए ‘पुत्र रत्न’:
| सतिया देवी | मानाराम देवासी | सिरोड़ी, सिरोही |
| गुड़िया देवी | महेंद्र कुमार सुथार | बग, सिरोही |
| गीता देवी | प्रभुराम घांची | सिरोड़ी, रेवदर |
| लीला देवी | तेजाराम भील | अनापुर, रेवदर |
| दीपिका देवी | मोहन जी मेघवाल | हालीवाड़ा, सिरोही |
| गजरा देवी | श्री अगराराम चौधरी | अनापुर, रेवदर |
| डाली देवी | वालाराम कलबी | उड़वारिया, रेवदर |
सामान्य प्रसव है स्वस्थ भविष्य की नींव
आज के समय में जहाँ प्रसव के दौरान मामूली जटिलता होने पर भी ऑपरेशन का सहारा लिया जाता है, वहाँ एक साथ 7 सामान्य प्रसव होना एक बड़ी उपलब्धि है। डॉ. भाटी ने यह सिद्ध कर दिया कि सही देखरेख, धैर्य और उचित डॉक्टरी सलाह से सामान्य प्रसव को प्राथमिकता दी जा सकती है। यह न केवल मां के जल्द रिकवरी के लिए बेहतर है, बल्कि नवजात के भविष्य के स्वास्थ्य के लिए भी वरदान है।
इतिहास और चिकित्सा का तालमेल
इतिहास गवाह है कि मारवाड़ और अर्बुद (सिरोही) की धरा हमेशा से अपनी जीवटता के लिए जानी जाती रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग प्राकृतिक तरीकों और अनुभवी चिकित्सकों पर गहरा विश्वास रखते हैं। डॉ. भाटी द्वारा इन सात महिलाओं को दिया गया सुरक्षित प्रसव का अनुभव जिले के चिकित्सा इतिहास में एक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।
विशेषज्ञ का संदेश: “एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए प्रसव के समय मां का हौसला और चिकित्सक का सही निर्णय सबसे महत्वपूर्ण होता है।”



