भील आदिवासी समाज ने विभिन्न मांगों को लेकर देवासी को ज्ञापन सौंपा | जल, जंगल, और ज़मीन पर संकट | क्या भील समाज को मिलेगा इंसाफ़?
जसवंतपुरा। भाद्रपद शुक्ल एकादशी के मौके पर जसवंतपुरा और दांतलावास सहित पूरे क्षेत्र में बाबा रामदेव जी के मंदिरों में मेलों का आयोजन हुआ। इन मेलों में रानीवाड़ा विधायक रतन देवासी ने भील और मेघवाल समाज के कार्यक्रमों में शिरकत की। इसी दौरान, दांतलावास में भील आदिवासी समाज ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर विधायक को एक ज्ञापन सौंपा, जिसने कई गंभीर मुद्दों को उजागर किया है।
राणा पूंजा की मूर्ति और सम्मान की लड़ाई
भील समाज ने विधायक से अपने गौरव, वीर योद्धा महानायक राणा पूंजा का स्मारक और मूर्ति राजपुरा-सुंधामाता तिराहे पर स्थापित करने की अनुमति मांगी। समाज ने बताया कि वे सदियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और प्रकृति के संरक्षण में उनका अहम योगदान रहा है। वे चाहते हैं कि उनके महानायक को उचित सम्मान मिले।
सुंधामाता पर छीन लिया गया रोज़गार
समाज की सबसे बड़ी चिंता सुंधामाता तीर्थ धाम पर उनके रोज़गार को लेकर है। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल से कुछ प्रभावशाली लोगों और ट्रस्ट द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है और झूठे मुकदमों की धमकी देकर उनकी आजीविका छीन ली गई है। भील समाज के लोग यहाँ घुड़सवारी, कैमल सफारी और छोटे-मोटे कारोबार से अपना और अपने परिवार का गुज़ारा करते थे, लेकिन अब सब कुछ बंद हो गया है। उन्होंने विधायक से मांग की है कि उन्हें अपने कारोबार फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाए।
अधूरी ज़मीन और अधूरा सपना
ज्ञापन में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया: जसवंतपुरा उपखंड मुख्यालय पर प्रस्तावित एकलव्य आवासीय विद्यालय के लिए सरकार द्वारा आवंटित ज़मीन कम पड़ रही है। समाज ने मांग की कि शेष ज़मीन जल्द से जल्द उपलब्ध कराकर निर्माण कार्य शुरू करवाया जाए, ताकि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
विधायक देवासी ने भील समाज की सभी मांगों पर तुरंत कार्रवाई और समाधान का भरोसा दिलाया है।







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