पंचायतों में भ्रष्टाचार की बाढ़, धामसीन में जीएलआर निर्माण पर गंभीर सवाल
रानीवाड़ा पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली कई ग्राम पंचायतों में इन दिनों भ्रष्टाचार की शिकायतों में जबरदस्त इजाफा हुआ है। राजस्थान सरकार के जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज हो रही शिकायतों में गुणवत्ता (Quality) और पारदर्शिता को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश साफ नजर आ रहा है। सबसे ताजा मामला ग्राम पंचायत धामसीन का है, जहां ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए बनाए जा रहे ग्राउंड लेवल रिजर्वायर (GLR) के निर्माण में भारी अनियमितताओं और धांधली की शिकायतें सामने आई हैं।
शिकायतकर्ता ने खोले निर्माण कार्य के पोल
शिकायतकर्ता कुलदीप सिंह देवड़ा ने जिला कलेक्टर को भेजी शिकायत में बताया कि जीएलआर का निर्माण घटिया सामग्री से किया जा रहा है। फाउंडेशन कार्य कमजोर है और उसे जमीन के स्तर से भी नीचे बनाया गया है, जबकि मानकों के अनुसार जीएलआर की नींव जमीन से कुछ ऊँची होनी चाहिए थी। सरियों (Steel rods) की गुणवत्ता और ग्रेड (Grade) भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है; सरियों की मोटाई और संख्या कम है और उनमें जंग भी लगी हुई देखी गई है।
सीमेंट, एग्रीगेट और बजरी में भी गड़बड़ी
देवड़ा के अनुसार, निर्माण कार्य में 43 या 53 ग्रेड का सीमेंट इस्तेमाल होना चाहिए, जबकि यहां घटिया और पुराने, नमीयुक्त सीमेंट के उपयोग की आशंका जताई गई है। कोर्स और फाइन एग्रीगेट (Aggregates) का अनुपात भी सही नहीं है, जिससे कंक्रीट की मजबूती प्रभावित होगी। एग्रीगेट की सफाई और मजबूती की अनदेखी की जा रही है। बजरी (Gravel) भी नदी से मीठी बजरी के बजाय नालों से निकाली गई मिलावटी बजरी का उपयोग हो रहा है, जिसमें मिट्टी और अन्य अशुद्धियाँ शामिल हैं।
पेयजल और पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल
शिकायत में यह भी कहा गया कि निर्माण कार्य में उपयोग हो रहे पानी की गुणवत्ता (Quality of Water) भी ठीक नहीं है, जिससे कंक्रीट का मिश्रण (Mixing) सही नहीं बन पा रहा है। पानी की मात्रा भी निर्धारित मानकों से कम है, जिससे निर्माण की मजबूती पर सीधा असर पड़ रहा है।
स्थानीय प्रशासन की उदासीनता, सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी पर आरोप
देवड़ा ने बताया कि उन्होंने स्थानीय सरपंच वचनाराम और ग्राम विकास अधिकारी सुरेशकुमार बिश्नोई को मौखिक रूप से शिकायत की, लेकिन दोनों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। सरपंच ने तो यहां तक कह दिया कि शिकायत से उनका कुछ नहीं बिगड़ सकता। ग्रामीणों का आरोप है कि पेयजल टांकों की स्वीकृति 4.90 लाख रुपये की है, लेकिन सरपंच आगे से आगे 50 फीसदी कमी में ठेका दे देते हैं। ऐसे में उच्च गुणवत्ता की उम्मीद करना बेमानी है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा, सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने रानीवाड़ा पंचायत समिति में व्याप्त कमीशनखोरी (Commissionkhori) और भ्रष्टाचार पर नाराजगी जताते हुए भजनलाल सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच नहीं की गई तो ग्रामीणों को भविष्य में भारी परेशानी उठानी पड़ेगी।
निष्कर्ष: ग्रामीणों की आवाज़ को मिले न्याय
धामसीन के ग्रामीणों की यह शिकायत न केवल स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि पंचायत स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार की गंभीरता को भी सामने लाती है। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।
"अगर समय रहते जांच नहीं हुई, तो ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए और भी ज्यादा संघर्ष करना पड़ेगा।" — कुलदीप सिंह देवड़ा







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