“जनप्रतिनिधि होकर किया महिला का अपमान” : न्यायालय का तीखा टिप्पणी
भीनमाल (जालोर)। जिला अपर सेशन न्यायाधीश राजेंद्र सहू की अदालत ने **धामसीन ग्राम पंचायत के सरपंच वचनाराम** के खिलाफ महिला उत्पीड़न मामले में जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा – “जब खेत की बाड़ ही फसल को नष्ट करने लगे, तो रक्षा कैसे होगी?”

घटना की पृष्ठभूमि
30 मई 2025 की रात बडगांव बस स्टैंड पर आरोपी ने परिवादी की बेटी को रोककर चुनरी खींची और मोटरसाइकिल पर बैठाकर छेड़छाड़ की कोशिश की। पीड़िता ने भागकर नजदीकी दुकान में शरण ली। मामला सामने आने पर आरोपी ने धमकी दी – “मैं सरपंच हूं, कुछ नहीं बिगाड़ सकते।”
कोर्ट का तल्ख तर्क
- आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 74 (अपहरण), 79 (यौन उत्पीड़न), 126(2) (सार्वजनिक शांति भंग) और 351(2) (अपमानजनक व्यवहार) लगाई गई हैं।
- न्यायाधीश ने कहा – “सरपंच जैसे लोक सेवक द्वारा महिलाओं का अपमान समाज में गलत संदेश देता है।”
- संस्कृत श्लोक “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते…” का हवाला देते हुए नारी सम्मान को राष्ट्रीय चरित्र बताया।
जमानत अस्वीकृति के प्रमुख आधार
- आरोपी का सरपंच होना और सार्वजनिक स्थल पर किया गया अपराध
- पीड़िता के साथ पहले भी छेड़छाड़ के आरोप
- साक्ष्यों में आरोप की पुष्टि
अगले चरण
पुलिस अब चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में जुटी है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि परिवादी पक्ष ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। परिवादी की पैरवी अधिवक्ता सत्यवान सिंह राजपुरोहित और कमलेश राजपुरोहित ने की।
न्यायिक टिप्पणी का सार
“सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। जब नेता ही नारी अस्मिता से खिलवाड़ करे, तो समाज में कानून का डर खत्म हो जाता है।” – न्यायाधीश राजेंद्र सहू
ख़ास खबर, सर्कल न्यूज़ संवाददाता, भीनमाल



