जालोर जिले में 9 उपखंड और 10 है तहसील, सभी उपखंडों के पास सिर्फ एक तहसील, ऐसे में 3 से 4 उपखंड हो सकते है समाप्त…!!
राजस्थान सरकार एक बार फिर प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रही है। हाल ही में कांग्रेस सरकार के आखिरी बजट में बनाए गए 9 नए जिले और 3 संभाग समाप्त करने के बाद अब सरकार की नजर उन उपखंड, तहसील और उप-तहसील कार्यालयों पर है, जो मापदंडों पर खरे नहीं उतरते। सरकार की नीति ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के तहत यह बदलाव प्रस्तावित है, जिससे प्रशासनिक इकाइयों का समानीकरण कर आमजन को अधिक राहत पहुंचाई जा सके।
क्या है प्रस्ताव?
- दो-तीन तहसील पर एक SDM ऑफिस:
अब दो या तीन तहसीलों के ऊपर एक उपखंड (SDM) कार्यालय बनाया जाएगा। इससे प्रदेश में 100 से ज्यादा उपखंड समाप्त किए जा सकते हैं, जो कुल उपखंडों का लगभग 32% है। - संख्या में बड़ा बदलाव:
वर्तमान में राजस्थान में 323 उपखंड हैं, जो घटकर 213 तक रह सकते हैं। 426 तहसीलों के हिसाब से यदि हर उपखंड के अधीन दो या तीन तहसील रखी जाएं, तो यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।
फैसले की प्रक्रिया और समिति की भूमिका
- विशेष समिति का गठन:
इस बदलाव के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता पूर्व आईएएस ललित के. पंवार कर रहे हैं। समिति में राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। - समिति का कार्य:
- सभी जिलों से फीडबैक लेना (अब तक आधे जिलों का फीडबैक जुटाया जा चुका है)
- राजस्व इकाइयों के पुनर्गठन के लिए मार्गदर्शी सिद्धांत और प्रशासनिक पद संरचना पर अनुशंसा करना
- प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और जन अपेक्षाओं के अनुसार सुलभ प्रशासन के लिए जिलेवार अनुशंसा तैयार करना
- समिति को छह माह में रिपोर्ट देनी है, जिसके बाद कैबिनेट अंतिम निर्णय लेगी।
प्रशासनिक इकाइयों पर संभावित असर
- उपखंड, तहसील, उप-तहसील:
उपखंडों की संख्या घटने से तहसील, उप-तहसील, राजस्व निरीक्षक (RI) और पटवार सर्कल की संख्या व संरचना पर भी असर पड़ेगा। - पटवार सर्कल:
सरकार का मानना है कि डिजिटलीकरण के इस युग में हर पंचायत पर पटवार सर्कल की आवश्यकता नहीं; दो छोटी पंचायतों पर एक पटवार सर्कल भी संभव है। इससे पटवार सर्कल की संख्या भी घट सकती है। - राजस्व न्यायालय:
प्रशासनिक इकाइयों के साथ-साथ राजस्व न्यायालयों की पद संरचना भी बदलेगी।
पृष्ठभूमि: हाल के प्रशासनिक बदलाव
- करीब छह महीने पहले ही गहलोत सरकार में बनाए गए 9 जिले और 3 संभाग समाप्त कर दिए गए थे।
- अब नए उपखंड, तहसील और राजस्व गांवों की सीमाएं तय करने की प्रक्रिया भी चल रही है1।
- पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी जनवरी 2025 से शुरू हो चुकी है, जिससे गांवों के नक्शे और राजनीतिक समीकरण भी बदलेंगे।
प्रभाव और निष्कर्ष
- प्रशासनिक लाभ:
- प्रशासनिक कार्यों में तेजी और पारदर्शिता आएगी।
- छोटे-छोटे प्रशासनिक इकाइयों के बजाय बड़े और सशक्त उपखंड, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग।
- डिजिटलीकरण से आमजन को ऑनलाइन सेवाएं अधिक सुलभ होंगी।
- राजनीतिक और सामाजिक असर:
- सीमाओं के पुनर्निर्धारण से कई क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
- जनप्रतिनिधियों के प्रभाव क्षेत्र में बदलाव संभव।
अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा
समिति की रिपोर्ट के बाद अंतिम निर्णय कैबिनेट में होगा कि किन-किन उपखंड, तहसील, उप-तहसील, RI सर्कल या पटवार सर्कल को कम किया जाएगा। इस बड़े प्रशासनिक बदलाव से राजस्थान का प्रशासनिक नक्शा पूरी तरह बदल सकता है और आमजन को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी प्रशासन मिलने की उम्मीद है।



