विशेष संवाददाता, डाडोकी (ग्राम पंचायत आखराड)
"प्यास के मारे हलक सूख रहा है, मवेशी दम तोड़ रहे हैं और मासूम बच्चे किताबों के बस्ते छोड़ पानी के लिए बेरे-बेरे (कुओं) की खाक छान रहे हैं।" यह दर्दनाक मंजर किसी दूर-दराज के वीराने का नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत आखराड के अंतर्गत आने वाले डाडोकी गांव और आसपास की ढाणियों का है।
डाडोकी- सांई जी की बेरी मार्ग से जुड़ी रबारियों की ढाणी, सुथारों की ढाणी, राजपूतों की ढाणी, चौधरीयों की ढाणी और गंगा सिंह जी की ढाणी समेत करीब 50 ढाणियों के बाशिंदे आज बूंद-बूंद पानी को मोहताज हो चुके हैं। समस्या की विकरालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को आक्रोशित महिलाओं, बुजुर्गों और ग्रामीणों ने सिर पर खाली घड़े और बाल्टियां उठाकर सड़क पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
मासूमों की पढ़ाई पर भारी पड़ा 'पानी का संकट'
गांव की राजकीय प्राथमिक विद्यालय (गंगा सिंह जी की ढाणी) में पढ़ने वाले छोटे-छोटे नौनिहालों की हालत बेहद दयनीय है। स्कूल के पानी के टांके पूरी तरह सूखे पड़े हैं। आसपास के जो पारंपरिक बेरे (कुएं) थे, उनका भूजल स्तर भी जवाब दे चुका है और वे सूख चुके हैं। आलम यह है कि बच्चे पढ़ाई छोड़ दूर-दराज के बेरों से पानी लाने को मजबूर हैं। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने स्कूल के सामने एकत्र होकर प्रशासन की अनदेखी पर रोष जताया।
"1400-1500 रुपये भरे, पर नर्मदा का पानी गायब!"
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ग्रामीण ने व्यथा बताते हुए कहा:
"नर्मदा परियोजना के नाम पर हम लोगों से 1400-1400 और 1500-1500 रुपये भरवाए गए, लेकिन आज तक पाइपलाइन से एक बूंद पानी नहीं टपका। लगभग 50 ढाणियों की आबादी त्रस्त है। ट्यूबवेल का जो पानी है, वह इतना फ्लोराइडयुक्त और खराब है कि उसे पीने से लोग बीमार पड़ रहे हैं। लोग दो-दो किलोमीटर दूर से सिर पर पानी ढोकर ला रहे हैं।"
बुजुर्गों और महिलाओं का छलका दर्द:
लाठी टेकते बुजुर्गों ने कहा:
"साहब! ढोर (पशु) प्यास से मर रहे हैं, इंसान तड़प रहे हैं। जब वोट मांगने आते हैं तो बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही कोई सुध नहीं लेता। अगर सरकार हमें पीने का पानी नहीं दे सकती, तो हमारा वोट लेने का भी किसी को हक नहीं है। जो पानी देगा, वोट उसी को मिलेगा।"
सिर पर घड़ा लिए एक बुजुर्ग महिला बोलीं:
"सरकार तो मां-बाप होती है, फिर हमें प्यासा क्यों मार रही है? हमारे बच्चे और मवेशी भूखे-प्यासे मर रहे हैं। जब तक पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं होगी, हम चुप नहीं बैठेंगे।"
ग्रामीणों की दो-टूक चेतावनी
ग्रामीणों ने जलदाय विभाग एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि:
गंगा सिंह जी की ढाणी स्कूल और ढाणियों में तुरंत प्रभाव से टैंकरों या आपातकालीन स्रोतों से पेयजल की आपूर्ति शुरू कराई जाए।
बंद पड़ी नर्मदा पेयजल लाइन की तकनीकी खामियों को दूर कर नियमित जलापूर्ति बहाल की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो पूरा गांव उग्र आंदोलन और आगामी चुनावों के पूर्ण बहिष्कार के लिए बाध्य होगा।
गले सूखे, सूख गए बेरे: क्या 1400 रुपये भरकर भी प्यासा ही मरेगा डाडोकी?
सिर पर खाली घड़े उठाए सड़कों पर उतरीं महिलाएं और बुजुर्ग; गंगासिंह जी की ढाणी स्कूल में प्यासे तड़प रहे नौनिहाल, ग्रामीणों का दो-टूक ऐलान— 'पानी नहीं तो वोट नहीं'

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