सांचौर (जालौर)। चुनावी ड्यूटी की ट्रेनिंग लेने पहुंचे सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों को जब थाली में बासी और खराब खाना मिला, तो उन्होंने उसे हाथ लगाने से ही इनकार कर दिया। सांचौर में आयोजित रिटर्निंग ऑफिसर, पीठासीन अधिकारी और पीओ प्रथम के प्रशिक्षण में भोजन की गुणवत्ता को लेकर बवाल मच गया। 334 संभागियों ने सामूहिक रूप से भोजन का बहिष्कार किया और प्रशिक्षण खत्म होते ही बिना खाए-पिए घर लौट गए।
334 संभागियों ने लिया हिस्सा
पंचायत समिति सभागार सांचौर और राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सांचौर में आज प्रशिक्षण आयोजित हुआ। इसमें सांचौर, चितलवाना, भादरूना, सरनाऊ और सरवाना क्षेत्र के कुल 334 अधिकारी-कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान परोसे गए भोजन को संभागियों ने बासी और खराब बताते हुए सामूहिक रूप से ग्रहण करने से मना कर दिया।
अधिकारियों को बताया, नहीं मिला संतोषजनक जवाब
राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील) के प्रदेश सभाध्यक्ष किशनलाल सारण ने बताया कि भोजन कथित रूप से बासी और खराब था। संभागियों ने असंतोष जताते हुए खाना नहीं खाया। मौके पर विकास अधिकारी और नायब तहसीलदार को इसकी सूचना दी गई, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। नतीजा यह रहा कि प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद कई अधिकारी-कर्मचारी बिना भोजन और नाश्ते के ही अपने घरों के लिए रवाना हो गए।
GPF, SI और समर्पित अवकाश का भुगतान महीनों से अटका
सारण ने कहा कि एक तरफ भोजन की गुणवत्ता की परेशानी है, तो दूसरी तरफ राज्य सरकार की भुगतान संबंधी नीतियों के कारण कर्मचारी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उनके अनुसार:
- समर्पित अवकाश के नकदीकरण और वेतन भुगतान, GPF तथा SI की राशि कई महीनों से लंबित है
- कोषालयों में बिलों का भुगतान अटका होने से कर्मचारियों को अपनी अर्जित राशि भी समय पर नहीं मिल रही
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी देयकों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है
उन्होंने कहा कि देरी से कर्मचारियों को ब्याज का नुकसान हो रहा है और घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई जैसी जरूरी जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो गया है। कर्मचारी संगठन जिला कलेक्टरों के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन दे चुके हैं, फिर भी राहत नहीं मिली, जिससे प्रदेशभर के कर्मचारियों में आक्रोश है।
कुक-कम-हेल्पर का मानदेय अप्रैल से बकाया
अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ, जिला जालौर के जिलाध्यक्ष रामनिवास साहू ने कहा कि विद्यालयों में कार्यरत कुक-कम-हेल्पर का मानदेय अप्रैल माह से बकाया है। कम मानदेय पर काम करने वाले इन कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि दीपावली नजदीक होने के बावजूद भुगतान न होना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
ये हैं प्रमुख मांगें
साहू ने मांग की कि राज्य सरकार:
- भुगतान संबंधी सभी बाधाएं तुरंत दूर करे
- समर्पित अवकाश वेतन, GPF, SI और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सभी लंबित भुगतान जारी करे
- कुक-कम-हेल्पर को बकाया मानदेय दिलवाए, ताकि त्योहार से पहले राहत मिल सके
ये रहे मौजूद
इस दौरान बाबूलाल कुराड़ा, राजेंद्र सऊ, पूनमचंद कड़वासरा, प्रकाश जीनगर, श्रवण कुमार मुखी, देवराज चौधरी, गणपतलाल खिलेरी, प्रधानाचार्य पूनमचंद विश्नोई, प्रभुराम चौधरी, रामलाल कुराड़ा, रघुनाथ भादू, हरचंदराम पोकरा, बीरबल गोदारा, सोहनलाल सारण, प्रवीण सोनी, सेंधाराम चौधरी, बुद्धाराम भादू और चुनीलाल कांवा सहित बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
कर्मचारी संगठनों ने साफ कहा कि भोजन की गुणवत्ता और लंबित भुगतान जैसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं का तत्काल समाधान करना चाहिए।









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