रानीवाड़ा (जालोर): रानीवाड़ा क्षेत्र में इस वर्ष कमजोर मानसून और बारिश की भारी कमी के चलते सूखे के गंभीर हालात पैदा हो गए हैं। किसानों द्वारा खून-पसीने की कमाई से बोई गई फसलें पूरी तरह सूखकर चौपट हो चुकी हैं, जिससे काश्तकारों की मेहनत पर पानी फिर गया है। क्षेत्र के नदी, नाले और तालाब सूख जाने से आमजन के साथ-साथ मूक पशुओं और वन्यजीवों के सामने पीने के पानी और चारे का भारी संकट खड़ा हो गया है।
इस विकट स्थिति को देखते हुए राजस्थान प्रशासक संघ शाखा रानीवाड़ा की ओर से उपखंड अधिकारी (एसडीएम) रानीवाड़ा के मार्फत माननीय मुख्यमंत्री के नाम 12 सूत्री ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में पूरे क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कर तुरंत अकाल राहत कार्य शुरू करने और किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की पुरजोर मांग की गई। इस दौरान प्रशासक जबराराम पुरोहित (डूंगरी), कृष्ण कुमार पुरोहित (सूरजवाड़ा), प्रदीप सिंह देवल (मालवाड़ा) और विकास सोलंकी (विकास कुमार) सहित संघ के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
ज्ञापन में रखी गईं प्रमुख मांगें:
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फसल खराबे का सर्वे व मुआवजा: सूखे के कारण बर्बाद हुई फसलों का तत्काल सर्वे करवाकर काश्तकारों को प्रति हेक्टेयर के आधार पर उचित मुआवजा दिलाया जाए।
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पालतू पशुओं के लिए अनुदान: चारे-पानी की कमी से जूझ रहे किसानों के पालतू पशुओं की सुरक्षा के लिए पशुओं का सर्वे करवाकर प्रति पशु अनुदान स्वीकृत किया जाए।
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फसल बीमा क्लेम का भुगतान: बीमा कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगाई जाए और कृषि व राजस्व अधिकारियों से तुरंत सर्वे करवाकर किसानों को समय पर बीमा क्लेम दिलवाया जाए।
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अकाल राहत कार्य व रोजगार: सूखे के कारण बेरोजगार हुए दिहाड़ी मजदूरों के लिए क्षेत्र में शीघ्र अकाल राहत कार्य प्रारंभ करवाए जाएं।
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जल जीवन मिशन में अनियमितताओं की जांच: जल जीवन मिशन के तहत कई गांवों में काम अधूरे पड़े हैं और बिना जलापूर्ति के ही भुगतान उठाया जा रहा है; इसकी निष्पक्ष जांच करवाई जाए और पेयजल आपूर्ति बहाल की जाए। साथ ही जलदाय विभाग द्वारा पानी के टांकों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।
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गौशालाओं को 12 माह का अनुदान: सूखे की मार झेल रही गौशालाओं का सर्वे करवाकर 12 महीने के लिए चारा अनुदान दिया जाए और बेसहारा गोवंश के लिए भी चारे-पानी के निर्देश जारी हों।
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नर्मदा नीर से भरे जाएं तालाब: गिरते भूजल स्तर और सूखे कुओं-बावडियों को देखते हुए क्षेत्र के तालाबों में नर्मदा नहर का पानी डाला जाए, ताकि भूजल स्तर सुधरे और वन्यजीवों व मवेशियों को पेयजल मिल सके।
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स्वास्थ्य एवं अन्य व्यवस्थाएं: मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए सचल चिकित्सालयों (मोबाइल वैन) की संख्या बढ़ाई जाए, खाद्य सुरक्षा में पर्याप्त राशन मिले और पौधारोपण को बचाने के लिए विशेष बजट आवंटित किया जाए।
प्रशासक संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि हालात की गंभीरता को देखते हुए अविलंब राहत कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों और पशुपालकों को इस विकट आपदा से उबारा जा सके।









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