“खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे, बता तेरी रज़ा क्या है।” यह उक्ति चरितार्थ होती है थार रेगिस्तान के रामगढ़ ग्राम के रहने वाले विजय दैया (पीपा क्षत्रिय) पर, जिन्होंने बिना किसी कोचिंग के घर पर तैयारी करते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर (अंग्रेज़ी) पद पर सफलता प्राप्त की है।

सामाजिक और ग्रामवासी खुशी में झूम उठे
विजय दैया का चयन राजकीय महाविद्यालय, शिव बाड़मेर में असिस्टेंट प्रोफेसर (अंग्रेज़ी) के पद पर हुआ है। इस परिणाम ने उनके समाज और ग्रामवासियों में भारी उत्साह भर दिया है। सभी ने उन्हें फोन एवं व्यक्तिगत रूप से बधाइयाँ दीं। वर्तमान में वे राउमावि भोजराज की ढाणी में अंग्रेजी के वरिष्ठ अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं और 2011 से शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएँ दे रहे हैं।

शैक्षिक सेवाओं में रहा उत्कृष्ट योगदान
विजय दैया ने राजकीय विद्यालय रामगढ़ और नेतसी में शिक्षण के क्षेत्र में शानदार परिणाम दिए। उन्होंने छात्रों को निरंतर शत-प्रतिशत परिणाम दिलाए और विद्यालयों में भामाशाहों के माध्यम से विकास कार्य करवाए। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें वर्ष 2020 में राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
पारिवारिक और गुरुजनों का मिला सहयोग
श्री दैया ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने दिवंगत माता-पिता, गुरुजनों, धर्मपत्नी और मित्रों को दिया। वे बताते हैं कि घर पर रहते हुए उन्होंने कठिन परिश्रम से यह मुकाम हासिल किया।

शिक्षा और अनुकरणीय प्रेरणा का स्रोत
विजय दैया ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रामगढ़ के राजकीय विद्यालय में पूरी की और फिर जेएनवीयू, जोधपुर से अंग्रेज़ी विषय में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। अंग्रेजी विषय के प्रति उनके अनुराग और निष्ठा ने उन्हें यह उपलब्धि दिलाई। उनकी सफलता उनके गाँव और क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
शिक्षा के क्षेत्र का गौरव
पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा को बढ़ावा देने वाले विजय दैया की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गाँव और समाज के लिए गर्व का विषय है। उनके इस कार्य से क्षेत्र के अन्य युवा निश्चित रूप से प्रेरित होकर शिक्षा और सफलता की ओर कदम बढ़ाएँगे।







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