नाली निर्माण से लेकर पौधारोपण तक के नाम पर फर्जीवाड़ा; जांच में जुर्म साबित होने के बाद भी साहबों की मेहरबानी बरकरार, एफआईआर का इंतजार!
सर्कल न्यूज़ नेटवर्क सिरोही/शिवगंज। ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर आने वाले बजट पर किस कदर ‘अपनों’ का कब्जा जमाया जा रहा है, इसका ताजा और झकझोर देने वाला मामला हालीवाडा ग्राम पंचायत में सामने आया है। तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी (VDO) प्रशांत कुमार और तत्कालीन सरपंच व प्रशासक शांतिलाल पुरोहित की सांठगांठ से सरकारी खजाने को चूना लगाने का ऐसा बड़ा खेल रचा गया, जिसने प्रशासनिक महकमे की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विकास कार्यों के नाम पर कागजों में तो ठेकेदारों और मजदूरों के भुगतान दर्शाए गए, लेकिन ऑनलाइन सिस्टम के जरिए लाखों रुपये की राशि सीधे तत्कालीन VDO प्रशांत कुमार ने अपने ही पिता लक्ष्मण कुमार के बैंक खाते में ट्रांसफर कर डाली।

कागजी लीपापोती और असली खेल
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, पंचायत समिति सिरोही के अतिरिक्त विकास अधिकारी की जांच रिपोर्ट में साफ हुआ है कि 15वें वित्त आयोग और अन्य मदों के बजट का जमकर दुरुपयोग हुआ। वर्ष 2020-21 में दुलाराम के घर से जैन धर्मशाला की ओर नाली निर्माण के नाम परस्वीकृत 2 लाख 89 हजार रुपये की राशि रोकड बही में तो वागाराम सोमाजी को दी जानी दर्शाई गई। लेकिन जब ऑनलाइन वाउचर संख्या XVFC/2023-24/P/1 (दिनांक 28.04.2023) की जांच की गई, तो पता चला कि यह पूरी राशि VDO के पिता लक्ष्मण कुमार के खाते में जमा करा दी गई थी। इसी तरह पौधारोपण के नाम पर हीमाराम को दर्शाया गया 20,500 रुपये का भुगतान और जेसीबी व सफाई कार्य के नाम पर वागाराम सोमाजी के नाम दर्ज 1,00,000 रुपये का भुगतान भी कागजों में कुछ और तथा असल में VDO के पिता के खाते में ही पाया गया।

7 किस्तों में 4.76 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा
सीपी ग्राम पोर्टल पर जसवंतपुरा (जालोर) निवासी भंवर राजपुरोहित द्वारा दर्ज करवाई गई शिकायत (MOPRJ/E/2026/002713) की जांच में कुल 7 अलग-अलग किस्तों के जरिए ₹4,76,000 की वित्तीय अनियमितता व अवैध भुगतान प्रमाणित पाया गया है।
| क. सं. | ऑनलाइन वाउचर संख्या एवं दिनांक | भुगतान राशि (रुपये में) | वास्तविक प्राप्तकर्ता |
|---|---|---|---|
| 1 | 24075136 / 02.02.2023 | 12,000/- | लक्ष्मण कुमार |
| 2 | 24328247 / 05.04.2023 | 6,000/- | लक्ष्मण कुमार |
| 3 | XVFC/2023-24/P/1 / 28.04.2023 | 2,89,000/- | लक्ष्मण कुमार |
| 4 | 24399536 / 12.05.2023 | 3,000/- | लक्ष्मण कुमार |
| 5 | 24730515 / 08.08.2023 | 20,500/- | लक्ष्मण कुमार |
| 6 | 24759764 / 15.08.2023 | 1,00,000/- | लक्ष्मण कुमार |
| 7 | 25174509 / 05.12.2023 | 45,500/- | लक्ष्मण कुमार |
| कुल | 4,76,000/- | (VDO के पिता) |
जांच में जुर्म साबित, फिर भी मेहरबानी क्यों?
हैरानी की बात यह है कि जांच रिपोर्ट में आरोप पूरी तरह प्रमाणित होने और वसूली के आदेश जारी होने के बावजूद अब तक आरोपी तत्कालीन VDO के खिलाफ गबन का आपराधिक मामला दर्ज कराने में ढिलाई बरती जा रही है। बिना निविदा, बिना एमबी (MB) और बिना कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र (CC) के सीधे अपने ही पिता के खाते में रकम ट्रांसफर कर देना साफ तौर पर आपराधिक कृत्य है। इसके बावजूद सिर्फ रिकवरी और पत्राचार तक सिमटी प्रशासनिक कार्रवाई यह सवाल खड़ा करती है कि क्या इस गबन के खेल में उच्चाधिकारियों या राजनेताओं की भी मूक सहमति या मिलीभगत है? ग्रामीण अब सवाल पूछ रहे हैं कि जनता के पैसे पर डाका डालने वाले इस ‘बाप-बेटे’ के सिंडिकेट और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज कब गिरेगी?



