धानेरा (बनासकांठा)।
सरहद की मिट्टी में जब देशभक्ति का बीज बोया जाता है, तो दशरथ सिंह सोलंकी जैसे जांबाज तैयार होते हैं। बनासकांठा जिले के धानेरा तालुका के एक छोटे से गांव अनापुर छोटा में इन दिनों दिवाली जैसा माहौल है। वजह है—गांव के लाडले और साधारण राजपूत परिवार के सपूत दशरथ सिंह सोलंकी का CISF की कठिन ट्रेनिंग पूरी कर पहली बार फौजी वर्दी में घर लौटना। आगामी 24 जनवरी को जब दशरथ सिंह गांव की सीमा में कदम रखेंगे, तो सैकड़ों युवाओं की बाइक रैली और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका ऐतिहासिक इस्तकबाल किया जाएगा।

कठिन तपस्या से हासिल की वर्दी
दशरथ सिंह का चयन 22 जनवरी 2025 को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में हुआ था। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ के भिलाई में 11 महीने की वह कड़ाके की ट्रेनिंग पूरी की, जो एक साधारण युवक को लोहे जैसा फौलाद बना देती है। इस दौरान उन्होंने हथियारों का संचालन, फील्ड क्राफ्ट, डिजास्टर मैनेजमेंट और ऊंची इमारतों से रैपलिंग जैसी चुनौतियों को पार किया। वर्तमान में वे केरल में स्थित देश के गौरव भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (ISRO) की सुरक्षा में तैनात हैं।
देशभक्ति का जज्बा: युवाओं के लिए प्रेरणा
अनापुर छोटा जैसे सीमावर्ती गांवों के लिए दशरथ सिंह एक मिसाल बन गए हैं। एक साधारण परिवार से निकलकर देश के सबसे संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा का जिम्मा उठाना यह साबित करता है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो मंजिल दूर नहीं। पिता गोपाल सिंह सोलंकी और माता के चेहरे की खुशी आज पूरे गांव की मुस्कान बन गई है।
विशेष जानकारी: क्या है CISF और कैसे बनें जवान?
CISF (Central Industrial Security Force) क्या है?
यह गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाला एक अर्धसैनिक बल है। इसका मुख्य कार्य देश के महत्वपूर्ण सरकारी बुनियादी ढांचों की सुरक्षा करना है, जैसे:
- हवाई अड्डे (Airports)
- मेट्रो रेल
- परमाणु संस्थान और अंतरिक्ष केंद्र (जैसे ISRO)
- ऐतिहासिक स्मारक (जैसे ताज महल)
भर्ती की प्रक्रिया (How to Join):
अगर आप भी दशरथ सिंह की तरह वर्दी पहनना चाहते हैं, तो इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:
- शैक्षणिक योग्यता: न्यूनतम 10वीं पास (कॉन्स्टेबल/GD पद के लिए)।
- चयन परीक्षा: SSC GD (Staff Selection Commission) द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा।
- शारीरिक मानक: परीक्षा पास करने के बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) और मेडिकल टेस्ट होता है।
- ट्रेनिंग: चयन के बाद लगभग एक साल की कठिन ट्रेनिंग दी जाती है।







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