बिना सर्जरी डिलीवरी का बना केंद्र, मारवाड़ ही नहीं, गुजरात तक से पहुंच रहीं महिलाएं
रेवदर (सिरोही)। जब डॉक्टरी सलाह में 'सिजेरियन जरूरी है' जैसे शब्द सुनकर अधिकांश परिवार हिम्मत हार जाते हैं, तब रेवदर कस्बे का एक छोटा-सा हॉस्पिटल भारती हॉस्पिटल एंड सोनोग्राफी सेंटर उनके लिए आशा की नई किरण बनकर उभरता है।
यहां के वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. एस. एस. भाटी और उनकी अनुभवी टीम उन महिलाओं के लिए भी नॉर्मल डिलीवरी का मार्ग बनाते हैं, जिन्हें अन्य अस्पताल हाई-रिस्क बताकर ऑपरेशन की सलाह दे देते हैं।
🌸 5 किलो वजन के बच्चे को दिया नॉर्मल जन्म – वराडा की सुखी देवी की मिसाल
जब सुखी देवी पत्नी कसना राम देवासी (निवासी वराडा, सिरोही) के गर्भस्थ शिशु का वजन 5 किलोग्राम निकला, तो सिरोही के प्रमुख अस्पतालों ने सी-सेक्शन की सलाह दी। परिजन निराश थे।
ऐसे में भारती हॉस्पिटल रेवदर पहुंचते ही यहां की टीम ने बिना देर किए नॉर्मल डिलीवरी करवाई और ये साबित कर दिया कि चिकित्सा सिर्फ मशीन नहीं, भावना भी है।
🌼 पहले दो बार ऑपरेशन, इस बार बिना चीरा नॉर्मल डिलीवरी – करड़ा की पारू देवी को राहत
पारू देवी पत्नी जेमता राम देवासी (निवासी करड़ा, जालोर) की पहले भीनमाल और फिर धानेरा (गुजरात) में सीजेरियन डिलीवरी हो चुकी थी। तीसरी बार भी परिवार सर्जरी के डर से सहमा हुआ था।
पर भारती हॉस्पिटल की विशेषज्ञ टीम ने बिना चीरा, बिना टांका के नॉर्मल डिलीवरी करवाकर एक असाधारण मिसाल पेश की।
🌷 कमज़ोर शरीर, 7 ग्राम हीमोग्लोबिन, फिर भी सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी – मेथीपुरा की कांता देवी की कहानी
कांता देवी पत्नी भरत गरासिया, जो निमतलाई में एक खेत पर मजदूरी करती हैं, की डिलीवरी को हाई-रिस्क बताया गया – कारण था कम हीमोग्लोबिन (7 ग्राम) और उच्च बीपी।
दो-तीन डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी, लेकिन रेवदर के भारती हॉस्पिटल पहुंचते ही टीम ने बिना ऑपरेशन के सुरक्षित डिलीवरी कर गरीब परिवार में खुशियां लौटा दीं।
🌻 पहली बार सीजेरियन, दूसरी बार नॉर्मल डिलीवरी – डूडसी की रिंकू देवी को मिली राहत
रिंकू देवी पत्नी भरत कुमार सुथार (निवासी डूडसी, जालोर) की पहली डिलीवरी बागरा के निजी अस्पताल में सीजेरियन से हुई थी। इस बार भी जालोर के कई अस्पतालों में उन्हें ऑपरेशन की सलाह दी गई।
पर एक परिचित के सुझाव पर वे भारती हॉस्पिटल पहुंचीं, जहां बिना किसी सर्जरी के नॉर्मल डिलीवरी कर परिजनों को बड़ी राहत दी गई।
एक डॉक्टर, एक दृष्टिकोण, और सैकड़ों मातृत्व की मुस्कानें
डॉ. एस. एस. भाटी के बारे में पूरे मारवाड़ में आम धारणा है – “इनके पास ऑपरेशन अंतिम विकल्प होता है, प्राथमिकता होती है सुरक्षित नॉर्मल डिलीवरी।”
डॉक्टर भाटी और उनकी टीम यह सिद्ध कर रही है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, तकनीकी दक्षता और मानवता जब एक साथ आती है, तब चमत्कार होते हैं – वो भी बिना ऑपरेशन, बिना दर्द के।
🔹 रिपोर्ट: विशेष संवाददाता – सर्कल न्यूज़ डिजिटल डेस्क, रेवदर
🔹 सम्पर्क: [email protected]







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