सांचोर। सांचोर जिला बचाओ संघर्ष समिति का धरना सोमवार को 170वें दिन भी जारी रहा। उपखंड बागोडा की ग्राम पंचायत डूंगरवा से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने धरना स्थल पहुंचकर समिति को समर्थन दिया और अतिरिक्त जिला कलेक्टर सांचोर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
संघर्ष समिति के संयोजक अधिवक्ता भीमाराम चौधरी की अध्यक्षता में चल रहे इस धरने में पूर्व मंत्री सुखराम बिश्नोई समेत कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे। समिति ने स्पष्ट किया कि सांचोर जिला निरस्तीकरण का कोई ठोस आधार सरकार ने नहीं बताया है। जालोर से सांचोर की दूरी 145 किमी और अंतिम गांव आकोड़िया रणखार करीब 250 किमी दूर है, ऐसे में आमजन के लिए जिला मुख्यालय सांचोर ही सुविधाजनक था। जिला बनने से लोगों के जिले स्तर के कार्य त्वरित होते थे, लेकिन अब आमजन को भटकना पड़ रहा है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
धरने में वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने रानीवाड़ा और बागोडा के लोगों की नाराजगी का हवाला देकर जिला निरस्त किया, जबकि इन क्षेत्रों के लोग रोजाना सांचोर एडीएम कार्यालय आकर अपने काम करवा रहे हैं। सरकार ने बिना किसी ठोस कारण के सांचोर जिले को निरस्त कर ADM कार्यालय पुनः खोल दिया, जिससे लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
डूंगरवा के ग्रामीणों ने भी कहा कि जालोर बहुत दूर है, जबकि सांचोर नजदीक है। सरकार का यह फैसला सांचोर की जनता के साथ अन्याय है। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि जब तक सांचोर को पुनः जिला घोषित नहीं किया जाता, धरना समाप्त नहीं होगा। समिति ने बताया कि पिछले साल 29 दिसम्बर 2024 से यह आंदोलन लगातार जारी है और महापड़ाव की समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
धरने में खेतसिंह बिछावादी, रेवात्सिंह बिछावादी, जगसिंह भाटकी, जीवाराम सरवाना, जगदीश खिलेरी, पबसिंह हाडेचा, भेराराम चौधरी, फगलूराम सुथाना, गुलाब सिंह राजपूत, बलवंत सिंह राजपूत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
संघर्ष समिति का संकल्प है कि सांचोर को पुनः जिला घोषित करवाकर ही आंदोलन समाप्त किया जाएगा।







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