सिवाड़ा (चितलवाना/सांचोर): राजस्थान के सांचोर जिले के चितलवाना क्षेत्र में इन दिनों पंचायत चुनाव की सरगर्मियां सातवें आसमान पर हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा सिवाड़ा ग्राम पंचायत की हो रही है, जहाँ इस बार का मुकाबला आम चुनावों से बिल्कुल जुदा और बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुँच चुका है।
सिवाड़ा सीट सामान्य (ओपन) घोषित हुई है, यानी यहाँ से महिला और पुरुष दोनों चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। जहाँ आमतौर पर ऐसी सीटों पर पुरुषों का ही दबदबा देखा जाता है, वहीं इस बार चुनावी अखाड़े में ताल ठोक रहे चार प्रबल दावेदारों में से तीन पुरुषों के सामने अकेली महिला प्रत्याशी देबू बिश्नोई चट्टान बनकर खड़ी हो गई हैं।
यह सिर्फ एक महिला का चुनाव लड़ना भर नहीं है, बल्कि राजनीति में 'बदलाव और विकास' की एक नई इबारत लिखने की शुरुआत मानी जा रही है।
डिग्री रसोई की चौखट तक नहीं, विकास का हथियार बनेगी
देबू बिश्नोई कोई आम प्रत्याशी नहीं हैं। वे अंग्रेजी (English) और भूगोल (Geography) में डबल एम.ए. (Double M.A.) हैं। उच्च शिक्षित होने के बावजूद उन्होंने राजनीति को सत्ता हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मिशन चुना है।
"जब बेटियाँ पढ़ेंगी तो परिवार संवरेगा, लेकिन जब पढ़ी-लिखी बेटी पंचायत की कमान संभालेगी तो पूरा गाँव आत्मनिर्भर बनेगा।" — इसी सोच के साथ देबू बिश्नोई ने चुनावी मैदान में कदम रखा है।
नर्मदा का पानी, ईसबगोल का सोना और फूड प्रोसेसिंग यूनिट का विजन
सिवाड़ा और आसपास का पूरा क्षेत्र नर्मदा नहर के कमांड एरिया में आता है। यहाँ सिंचित उपजाऊ जमीन है और इसबगोल (घोड़ा जीरा) की पैदावार भारी मात्रा में होती है। लेकिन सालों से किसान अपनी उपज को औने-पौने दामों में बिचौलियों को बेचने को मजबूर हैं।
भूगोल (Geography) की गहरी समझ रखने वाली देबू बिश्नोई ने इस समस्या की नब्ज पहचानी है। उनका मास्टर प्लान है:
- फूड प्रोसेसिंग और क्लीनिंग यूनिट: सरकारी सब्सिडी (Subsidy) का पूरा लाभ दिलवाकर गाँव में ही ईसबगोल की क्लीनिंग और प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित करवाना, ताकि किसानों को उनकी फसल का दोगुना मूल्य मिले।
- स्थानीय स्तर पर रोजगार: यूनिट्स के लगने से गाँव के युवाओं और महिलाओं को घर के पास ही पक्का रोजगार मिलेगा, जिससे पलायन रुकेगा।
- वैज्ञानिक और औषधीय खेती: किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ मेडिसिनल (औषधीय) और आधुनिक वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित करना, जिससे कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके।
- महिला स्व-रोजगार समूह: गाँव की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जोड़कर कुटीर उद्योगों और लघु उद्योगों की स्थापना करवाना।
पुरूष प्रधान राजनीति में बही बदलाव की बयार
क्षेत्र के बुजुर्गों और प्रबुद्ध जनों का कहना है कि सिवाड़ा के इतिहास में यह पहली बार देखा जा रहा है जब एक ओपन सीट पर, तीन मजबूत पुरुष दावेदारों के सामने एक उच्च शिक्षित महिला पूरे दमखम, ठोस विजन और विकास के एजेंडे के साथ ताल ठोक रही है।
देबू बिश्नोई का मानना है कि पंचायत का सरपंच सिर्फ नाली और खड़ंजे बनवाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सरपंच ऐसा हो जो सरकारी योजनाओं को गाँव के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का विजन और समझ रखता हो।
गाँव की चौपालों से लेकर ढाणियों तक अब एक ही चर्चा है—क्या इस बार सिवाड़ा की जनता जाति और पुराने ढर्रे की राजनीति से ऊपर उठकर एक पढ़ी-लिखी, विजनरी महिला के हाथों में गाँव की तकदीर सौंपेगी? मुकाबला बेहद रोचक हो चुका है और देबू बिश्नोई का यह कदम पूरे इलाके की महिलाओं के लिए एक मिसाल बन गया है।









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