न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय सांचौर द्वारा प्रकरण में जांच कर नतीजा 18/08/25 को पेश करने के आदेश दिये गये है।
सांचौर | 21 जून 2025 देवड़ा निवासी पारसमल पुत्र जैसाराम सुथार ने गंभीर आरोप लगाते हुए झाब थाना पुलिस पर संज्ञेय अपराध की जानकारी होने के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया है। प्रकरण में पीड़ित ने न्यायालय में परिवाद पेश कर थानाधिकारी व अन्य लोक सेवकों पर आरोपियों से सांठगांठ कर अपराध को दबाने का आरोप लगाया है।
पीड़ित पारसमल का कहना है कि 8 दिसंबर 2024 की रात करीब 1:30 बजे भंवरलाल पुत्र गुलाबाराम सुथार, मोटाराम पुत्र लसुराम व जीवाराम पुत्र लसुराम जाति पुरोहित निवासी देवड़ा ट्रैक्टर पर सवार होकर उसके खेत में पहुंचे। आरोप है कि तीनों ने खेत में लगे लोहे के गेट को ट्रैक्टर से टक्कर मारकर तोड़ दिया और दो सीमेंट के चिने भी क्षतिग्रस्त कर दिए, जिससे लगभग 50 हजार रुपए का नुकसान हुआ।

पारसमल ने बताया कि घटना से पूर्व उसे गेट तोड़ने की धमकी दी गई थी, इसलिए वह खेत की निगरानी कर रहा था और पूरी घटना उसकी आंखों के सामने हुई। उसने घटना की टेलीफोनिक सूचना 9 दिसंबर को सुबह 2 बजे पुलिस को दी, और फिर 11 दिसंबर को थाना झाब में लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत की।
पीड़ित का आरोप है कि स्पष्ट साक्ष्य और गंभीर धाराओं के बावजूद पुलिस ने आज दिन तक मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके बाद उसने 19 दिसंबर को पुलिस अधीक्षक जालोर, आईजी पाली रेंज व डीजीपी जयपुर को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से रिपोर्ट दी, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई।
पारसमल का यह भी कहना है कि थानाधिकारी कमलेश कुमार और हेड कॉन्स्टेबल वजाराम ने जानबूझकर आरोपी पक्ष से मिलीभगत कर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही नहीं की और लोक कर्तव्यों की उपेक्षा की। पीड़ित ने कोर्ट में प्रस्तुत परिवाद में भारतीय न्याय संहिता की धारा 329(3), 351(2)/(3), 324(4), 326(A), 238, 61(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
इसके साथ ही उसने मांग की है कि थानास्तर पर जांच की बजाय किसी वरिष्ठ, निष्पक्ष और ईमानदार पुलिस अधिकारी से मामले की जांच करवाई जाए, ताकि उसे न्याय मिल सके।
पीड़ित ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह झाब थानाधिकारी को मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी करे और प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करवाए। न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय सांचौर द्वारा प्रकरण में जांच कर नतीजा 18/08/25 को पेश करने के आदेश दिये गये है। प्रकरण में पैरोकारी एडवोकेट पवनेश चन्द्र द्वारा की गई।।







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