सांचौर। जिले में चोरी और नकबजनी की वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत सरवाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने बिछावाड़ी गांव में हुई नकबजनी के मामले को मात्र 48 घंटों में सुलझाते हुए दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया मुख्य आरोपी भारमाराम नकबजनी का 'मास्टरमाइंड' है, जिस पर पहले से 20 मामले दर्ज हैं।
वारदात का विवरण: सूने मकान के ताले तोड़कर ले गए थे नकदी व जेवर
बीती 9 फरवरी 2026 को बिछावाड़ी निवासी दलपत सिंह पुत्र धुक सिंह राजपूत ने थाने में रिपोर्ट दी थी कि 8 और 9 फरवरी की दरम्यानी रात अज्ञात बदमाशों ने उनके रहवासी मकान के ताले तोड़कर चांदी के जेवरात और नकदी चोरी कर ली थी। पुलिस ने बीएनएस (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी व जमीनी साक्ष्य जुटाते हुए आरोपियों को दबोच लिया।

गिरफ्तार अभियुक्तों का प्रोफाइल
पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर पीछा कर इन दो बदमाशों को गिरफ्तार किया:
- भारमाराम पुत्र सोपाराम (32 वर्ष): निवासी भोगिया फली मोरस, थाना पिंडवाड़ा। (मुख्य सरगना, पूर्व में 20 प्रकरण दर्ज)।
- शंकराराम पुत्र गोमाराम गमेती (27 वर्ष): निवासी भोगिया फली मोरस, थाना पिंडवाड़ा। (पूर्व में 05 प्रकरण दर्ज)।
मोडस ऑपरेंडी: मोबाइल घर छोड़ते, झाड़ियों में छिपकर करते थे रेकी
पूछताछ में आरोपियों ने चोरी करने के अपने शातिर तरीके का खुलासा किया, जिसे सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई:
- टेक्नोलॉजी को चकमा: ये आरोपी वारदात के समय अपना मोबाइल फोन चालू हालत में घर पर ही छोड़ देते थे, ताकि उनकी लोकेशन ट्रेस न हो सके।
- शराब और बाइक का सफर: ये अपने गांव मोरस से दिन में शराब पीकर बाइक पर निकलते थे और सूर्यास्त के बाद टारगेट किए गए गांव पहुंच जाते थे।
- झाड़ियों में बसेरा: रात होने तक ये गांव के बाहर सरकारी जमीन या झाड़ियों में बाइक छिपाकर खुद भी वहीं छिप जाते थे।
- भारी हथियार का इस्तेमाल: गैंग का सरगना भारमाराम अपने साथ 3 किलो का भारी लोहे का सरिया रखता था। रात 1 से 2 बजे के बीच वे पैदल गांव में घुसते और टॉर्च से बड़े ताले वाले मकानों को निशाना बनाते थे।
पुराने मामलों का खुलासा: चितलवाना में भी दी थी दबिश
पकड़े गए आरोपियों ने शुरुआती पूछताछ में पुलिस थाना चितलवाना के रतोड़ा और चारणीम गांवों में भी चोरी की वारदातों को अंजाम देना कबूल किया है। भारमाराम की इस गैंग में सिरोही और उदयपुर के आदिवासी युवक शामिल हैं। यह शातिर अपराधी हर बार वारदात के लिए अपने साथी बदल लेता था ताकि पुलिस को उन तक पहुंचने में मुश्किल हो।
पुलिस टीम की तत्परता
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आवड़दान रतनू और डीएसपी जयराम मुण्डेल के निर्देशन में सरवाना थानाधिकारी मोहनराम के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया था। इस टीम में किशनलाल सउनि, हुसैन खां, पुनमाराम, मानाराम सहित पिंडवाड़ा पुलिस के मांगीलाल और अभयसिंह का भी विशेष सहयोग रहा।







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