एक पर एक कई प्रहार: नशे के स्तंभों को नेस्तनाबूत करने में जुटी एएनटीएफ-एटीएस
जयपुर/चित्तौड़गढ़। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस दिनेश एम.एन. के मार्गदर्शन में एएनटीएफ (Anti-Narcotics Task Force) और एटीएस (ATS) ने नशे के सौदागरों के खिलाफ ‘ऑपरेशन थर्ड चैप्टर’ चलाकर बड़ी सफलता हासिल की है। 10 वर्षों से पुलिस को चकमा दे रहे 25,000 रुपये के इनामी कुख्यात तस्कर मोहम्मद इमरान पुत्र खुर्शीद अहमद (निवासी: आश्रम रोड स्कूल के पास, बड़ी सादड़ी, जिला चित्तौड़गढ़) को कपासन थाना क्षेत्र से दस्तयाब किया गया है।
मकैनिक से तस्कर बनने का सफर: गाड़ियां ठीक करते-करते इंसान खराब करने लगा
आरोपी मोहम्मद इमरान की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। 10वीं पास करने के बाद उसने राजसमंद से आईटीआई की और बड़ी सादड़ी में मोटर गैराज खोल लिया। वह इतना कुशल मैकेनिक था कि चंद मिनटों में गाड़ियों के बड़े नुक्स ठीक कर देता था। इसी हुनर के कारण बड़े-बड़े तस्कर अपनी गाड़ियाँ ठीक कराने उसके पास आने लगे।
यहीं उसकी मुलाकात तस्कर प्रहलाद धाकड़ से हुई, जिसने उसे मोटे मुनाफे का लालच दिया। जल्द ही इमरान गैराज की आड़ में मादक पदार्थों की सप्लाई और दलाली करने लगा। लोगों को लगता था कि गैराज पर भीड़ उसके हुनर की वजह से है, लेकिन पीछे ‘जहर’ का खेल चल रहा था।
2015 से था फरार: बैंक अकाउंट्स ने खोली पोल
वर्ष 2015 में इमरान अपने साथियों प्रहलाद धाकड़ और वसनाराम पुरोहित के साथ अफीम के दूध की तस्करी कर रहा था। जालौर की रानीवाड़ा पुलिस ने वसनाराम को पकड़ लिया, लेकिन इमरान फरार हो गया। पिछले 10 साल से वह नाम बदलकर उदयपुर, राजसमंद और कांकरौली जैसे कस्बों में छिपकर रहता रहा। पुलिस से बचने के लिए वह खुद तो सबसे संपर्क रखता था, लेकिन किसी को अपने तक पहुंचने का रास्ता नहीं देता था। आखिरकार पुलिस ने जब उसके बैंक खातों का ‘पोस्टमार्टम’ किया, तब जाकर उसके काले धंधे की परतें खुलीं।
पकड़े जाने की रोचक पटकथा: ‘स्त्री हठ’ पड़ा भारी
इमरान की गिरफ्तारी बेहद नाटकीय रही। वह रिश्तेदारों से कोसों दूर रहता था, लेकिन दो दिन पहले ससुराल (प्रतापगढ़) में एक कार्यक्रम में जाने के लिए उसकी पत्नी अड़ गई। इमरान ने मना किया, पर पत्नी द्वारा ‘छोड़कर चले जाने की धमकी’ देने पर वह डर गया और झुक गया।
ससुराल पहुंचते ही ‘घर का भेदी लंका ढाए’ वाली कहावत चरितार्थ हुई। उसके अपने ही रिश्तेदारों ने एटीएस को सूचना दे दी। जब इमरान स्कॉर्पियो में सवार होकर निकला, तो एएनटीएफ-एटीएस की संयुक्त टीम ने कपासन के पास सिंहपुर टोल प्लाजा पर उसे धर दबोचा।
क्यों रखा गया ‘ऑपरेशन थर्ड चैप्टर’ नाम?
महानिरीक्षक पुलिस विकास कुमार ने बताया कि इस ऑपरेशन का नाम तीन विशेष कारणों से ‘थर्ड चैप्टर’ रखा गया:
- कुरान के तीसरे चैप्टर में ‘इमरान’ नाम का जिक्र है।
- इमरान की जिंदगी के दो अध्याय (मिस्त्रीगिरी और तस्करी) पूरे हो चुके थे, अब तीसरा अध्याय (जेल) शुरू होने वाला था।
- तीन पुत्रों के जन्म के बाद इमरान अक्सर कहता था कि “अब तीन हो गए, आगे का चैप्टर बंद”।
टीम को मिलेगी शाबाशी: इस कार्रवाई में एएनटीएफ मुख्यालय जयपुर, चित्तौड़गढ़ चौकी और एटीएस उदयपुर की विशेष भूमिका रही। महानिरीक्षक विकास कुमार ने पूरी टीम को सम्मानित करने की घोषणा की है।
अपील: पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अपराधी की सूचना एएनटीएफ कंट्रोल रूम (0141-2502877) या व्हाट्सएप नंबर (9001999070) पर दें। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा।



