गणेश चतुर्थी से शुरू होगा नहरों, वितरिकाओं और माइनरों की सफाई का महाअभियान, सालों पुराना गाद और झाड़ियों का संकट होगा दूर, अंतिम छोर तक निर्बाध बहेगा नर्मदा का पानी।
चितलवाना। मारवाड़ की तपती धरती पर जब पानी की एक-एक बूंद सोने के समान कीमती हो, तब सिंचाई के पानी को लेकर अन्नदाताओं की चिंता लाजिमी है। लेकिन इस बार रबी सीजन की बुवाई से पहले ही चितलवाना क्षेत्र के किसानों के चेहरों पर उम्मीद की एक नई चमक दिखाई दे रही है। चितलवाना ग्राम पंचायत की विकासोन्मुखी सरपंच प्रेमा देवी जगदीश बिश्नोई ने किसानों के हित में एक ऐसा ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है, जिसे क्षेत्र में कृषि क्रांति के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
सरपंच ने घोषणा की है कि रबी की फसल के लिए नर्मदा नहर का पानी छोड़े जाने से पहले ग्राम पंचायत क्षेत्र की तमाम नहरों, वितरिकाओं (डिस्ट्रीब्यूटरीज) और माइनरों की सघन सफाई करवाई जाएगी। इस विशेष सफाई महाअभियान का शंखनाद विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश के पावन पर्व, गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर किया जाएगा।

क्यों खास है यह फैसला? सालों पुरानी समस्या का होगा परमानेंट इलाज
चितलवाना और आसपास का क्षेत्र नर्मदा मुख्य नहर के तंत्र से जुड़ा हुआ है। सालों से किसानों की सबसे बड़ी पीड़ा यह रही है कि समय पर नहरों की मरम्मत और साफ-सफाई नहीं होने के कारण पानी खेतों तक सही ढंग से नहीं पहुंच पाता था। नहरों के भीतर जमा भारी गाद (मिट्टी), खरपतवार और बबूल की कंटीली झाड़ियां पानी के प्रवाह को रोक देती थीं।
नतीजा यह होता था कि रबी सीजन की शुरुआत में जब पानी छोड़ा जाता, तो वह हेड (शुरुआती छोर) पर ही रुक जाता या ओवरफ्लो हो जाता था, जबकि टेल (अंतिम छोर) पर बैठे हजारों किसान सिर्फ सूखी नहर को निहारते रह जाते थे। कई बार पानी के अभाव में बुवाई का सही समय निकल जाता, और जिन किसानों ने हिम्मत करके फसल बो भी दी, उनकी मेहनत बीच सीजन में पानी न मिलने से सूखकर स्वाहा हो जाती थी। सरपंच प्रेमा देवी बिश्नोई के इस फैसले ने अब इस दंश को हमेशा के लिए खत्म करने की नींव रख दी है।
प्रेरणादायक कहानी: घूंघट से निकलकर 'जल सहेली' बनने तक का सफर
इस बड़े फैसले के पीछे चितलवाना की प्रथम नागरिक प्रेमा देवी जगदीश बिश्नोई की वो सोच है, जो जमीन से जुड़ी हुई है। ग्रामीण परिवेश में जन्मी प्रेमा देवी ने खुद एक किसान परिवार की तकलीफों को बेहद करीब से देखा है। उन्होंने देखा है कि कैसे एक किसान रात-रात भर जागकर पानी का इंतजार करता है और पानी न मिलने पर उसकी पूरी साल की कमाई मिट्टी में मिल जाती है।
जब उन्होंने सरपंच का पद संभाला, तो उन्होंने पारंपरिक फाइलों और दफ्तरों के चक्कर काटने के बजाय सीधे खेतों का रुख किया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रेमा देवी ने खुद कई जगहों पर जाकर नहरों के अवरोधों को देखा और यह संकल्प लिया कि जब तक हर खेत तक पानी नहीं पहुंचेगा, तब तक पंचायत का विकास अधूरा है। इस अभियान के जरिए वे न केवल एक प्रशासनिक मिसाल पेश कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र के युवाओं और किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई हैं कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो संसाधनों की कमी कभी आड़े नहीं आती।
गांव-गांव में उत्साह, किसानों ने कहा- 'यह हमारी दीवाली से कम नहीं'
सरपंच की इस दूरदर्शी घोषणा के बाद पूरे चितलवाना क्षेत्र में जश्न का माहौल है। किसानों ने इसे कृषि हित में अब तक का सबसे बड़ा और सराहनीय कदम बताया है।
- विशेषज्ञों का आकलन (खेती-बाड़ी का गणित): कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि रबी सीजन से ठीक पहले नहरों की शत-प्रतिशत सफाई हो जाती है, तो पानी की गति (फ्लो) में करीब 35% की बढ़ोतरी होती है। इससे पानी बिना किसी बर्बादी के और कम समय में अंतिम छोर तक पहुंचता है। इससे न केवल समय पर बुवाई हो सकेगी, बल्कि फसलों को मिलने वाले पर्याप्त पानी से क्षेत्र में इस बार रबी फसलों (जैसे जीरा, इसबगोल, गेहूं और एरंडी) के उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक की बंपर बढ़ोतरी होने की पूरी उम्मीद है।
ग्रामीणों और बुजुर्ग किसानों का कहना है कि गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाला यह अभियान सिर्फ सरकारी काम नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बनेगा, जिसमें किसान भी श्रमदान करने के लिए आगे आ रहे हैं। इस भगीरथ प्रयास से चितलवाना की धरती आने वाले दिनों में और अधिक हरी-भरी और खुशहाल नजर आएगी।







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